चेन्नई के विशेषज्ञ ने स्वास्थ्य की सटीक जानकारी के लिए एआई-आधारित ‘एचआईवीई’ मंच विकसित किया

चेन्नई के विशेषज्ञ ने स्वास्थ्य की सटीक जानकारी के लिए एआई-आधारित ‘एचआईवीई’ मंच विकसित किया

चेन्नई के विशेषज्ञ ने स्वास्थ्य की सटीक जानकारी के लिए एआई-आधारित ‘एचआईवीई’ मंच विकसित किया
Modified Date: June 27, 2026 / 06:33 pm IST
Published Date: June 27, 2026 6:33 pm IST

नयी दिल्ली, 27 जून (भाषा) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और चिकित्सकीय विशेषज्ञता का समन्वय कर सत्यापित एवं साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक नया मंच विकसित किया गया है। इसे बनाने वालों का कहना है कि यह मंच भारत में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में मदद करेगा।

चेन्नई के महामारी विशेषज्ञ तथा ‘हनीबी पॉपुलेशन हेल्थकेयर फाउंडेशन’ (एचपीएचएफ) के संस्थापक निदेशक डॉ. विदुथलाई विरुम्बी बालगुरुसामी द्वारा विकसित ‘हेल्थकेयर इंटेलिजेंस एंड वेरिफिकेशन इंजन’ (एचआईवीई) को पारंपरिक एआई चैटबॉट से आगे बढ़कर काम करने के लिए तैयार किया गया है।

डेवलपरों के अनुसार, यह मंच रोगियों के चिकित्सकीय रिकॉर्ड, नैदानिक विश्लेषण, चिकित्सा साहित्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों और मौजूदा चिकित्सकीय दिशानिर्देशों के आधार पर अपनी सिफारिशों का सत्यापन करता है।

ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी के आधार पर उत्तर देने वाले सामान्य एआई उपकरणों के विपरीत, एचआईवीई कई प्रकार के साक्ष्यों और उपचार करने वाले चिकित्सक के नैदानिक अनुभव को एकीकृत कर ऐसी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध कराता है, जो पारदर्शी, स्पष्ट रूप से समझाई जा सकने वाली और प्रत्येक मरीज की जरूरत के अनुरूप हो।

यह मंच ऐसे समय में विकसित किया गया है, जब बड़ी संख्या में लोग स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए एआई पर निर्भर हो रहे हैं, जबकि भ्रामक सूचनाओं, बीमारी के निदान में देरी, अनुचित रूप से स्वयं दवा लेने और अविश्वसनीय स्वास्थ्य सलाह को लेकर चिंताएं भी लगातार बनी हुई हैं।

डेवलपरों का कहना है कि एचआईवीई का उद्देश्य इस कमी को दूर करना है, ताकि स्वास्थ्य संबंधी निर्णय अनुमान के बजाय प्रमाण-आधारित तथ्यों पर आधारित हों।

डॉ. बालगुरुसामी ने कहा, ‘‘स्वास्थ्य सेवा केवल जानकारी का विषय नहीं है, बल्कि विश्वास, संदर्भ और सत्यापन का भी प्रश्न है। एचआईवीई को इस तरह विकसित किया गया है कि स्वास्थ्य संबंधी निर्णय सामान्य जवाबों के बजाय विश्वसनीय साक्ष्यों, चिकित्सकीय विश्लेषण और मरीज की वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित हों।’’

उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को नैदानिक निर्णय लेने में सहायता देने के अलावा इस मंच की परिकल्पना अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सहयोग देने के लिए भी की गई है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित है।

फाउंडेशन के अनुसार, इसका दीर्घकालिक उद्देश्य ऐसा निवारक स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है, जो बीमारियों की शुरुआती पहचान को बढ़ावा दे, उपचार का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करे, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का विस्तार करे और लोगों को बीमारी गंभीर होने से पहले ही स्वास्थ्य संबंधी सुविचारित निर्णय लेने में सक्षम बनाए।

फाउंडेशन ने कहा कि यह मंच भारत की कई महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं, जैसे मातृ स्वास्थ्य, एनीमिया, मानसिक स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोग, पेरीमेनोपॉज, रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) और निवारक जांच जैसे क्षेत्रों में भी उपयोगी साबित हो सकता है। इसके तहत सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मियों को सत्यापित निर्णय-सहायता प्रणाली उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे स्वास्थ्य जोखिमों की समय रहते पहचान और शीघ्र हस्तक्षेप संभव हो सकेगा।

डॉ. बालगुरुसामी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य चिकित्सकों का स्थान लेने में नहीं, बल्कि उनकी क्षमता को और मजबूत बनाने में है।

उन्होंने कहा, ‘‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव निर्णय क्षमता का विकल्प नहीं बननी चाहिए, बल्कि उसे सशक्त बनाना चाहिए। हमारा उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें प्रौद्योगिकी, चिकित्सक और सार्वजनिक स्वास्थ्यकर्मी मिलकर लाखों लोगों के स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करें।’’

फाउंडेशन ने बताया कि वह फिलहाल एचआईवीई मंच आम लोगों को नि:शुल्क तथा चिकित्सकों, क्लीनिकों और अस्पतालों को रियायती दरों पर उपलब्ध करा रहा है। उसका मानना है कि विशेष रूप से सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में समानता सुनिश्चित करने के लिए सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तक व्यापक पहुंच आवश्यक है।

भाषा रवि कांत दिलीप

दिलीप


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