गोल मार्केट के पास झुग्गियों में तोड़फोड़ के मामले में एनडीएमसी के अस्पष्ट जवाब पर सीआईसी नाखुश
गोल मार्केट के पास झुग्गियों में तोड़फोड़ के मामले में एनडीएमसी के अस्पष्ट जवाब पर सीआईसी नाखुश
नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने गोल मार्केट के पास झुग्गियों में तोड़फोड़ और कथित पुनर्निर्माण के संबंध में आरटीआई के ‘अस्पष्ट’ जवाब के लिए नयी दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) से नाखुशी जताई है।
एमडीएमसी ने आगे की कार्रवाई न करने के लिए पुलिस बल की अनुपलब्धता का और बाद में आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का हवाला दिया है।
आवेदक ने यह जानकारी मांगी थी कि क्या मार्च 2022 में लगभग 45 झुग्गियों को ध्वस्त किया गया था और उसी स्थान पर लगभग 100 संरचनाएं कथित तौर पर फिर से कैसे बन गईं। आवेदक ने अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में भी जानकारी मांगी थी।
हालांकि, एनडीएमसी के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 2(एफ) का हवाला देते हुए अधिकतर प्रश्नों का उत्तर देने से इनकार कर दिया।
पुनर्निर्मित झुग्गियों के मुद्दे पर, एनडीएमसी ने कहा था कि तोड़फोड़ की कार्रवाई की योजना बनाई गई थी, लेकिन ‘‘पुलिस बल की अनुपलब्धता के कारण पुनर्निर्मित झुग्गियों को हटाने की प्रस्तावित कार्रवाई को अंजाम नहीं दिया जा सका। इसके बाद आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण तोड़फोड़ की कार्रवाई को स्थगित कर दिया गया।’’
आपत्ति जताते हुए सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने कहा कि ‘‘सीपीआईओ ने आरटीआई अधिनियम की धारा 2(एफ) का इस्तेमाल करते हुए यांत्रिक तरीके से बिंदु संख्या एक से तीन पर जानकारी देने से इनकार कर दिया है, बिना इस बात की पर्याप्त जांच किए कि मांगी गई जानकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध है या नहीं।’’
आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 2 (एफ) ‘सूचना’ को किसी भी रूप में किसी भी सामग्री यानी अभिलेख, दस्तावेज, ज्ञापन, ईमेल, राय, सलाह, प्रेस विज्ञप्ति, परिपत्र, अनुबंध, रिपोर्ट, नमूने या सार्वजनिक प्राधिकरण के नियंत्रण वाले डेटा के रूप में परिभाषित करती है।
तिवारी ने कहा कि प्रश्न ‘सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा की गई कार्रवाई से संबंधित थे, जिसका उत्तर रिकॉर्ड में उपलब्ध सीमा तक प्रदान किया जाना चाहिए था।’’
सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश देते हुए सीआईसी ने एनडीएमसी को उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर ‘संशोधित, बिंदुवार और विशिष्ट उत्तर’ जारी करने का आदेश दिया।
आयोग ने यह भी आदेश दिया कि यदि कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है, तो ‘‘इसका स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाना चाहिए।’’
भाषा संतोष वैभव
वैभव

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