कांग्रेस ने हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र का बहिष्कार किया; सैनी ने निशाना साधा
कांग्रेस ने हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र का बहिष्कार किया; सैनी ने निशाना साधा
(फोटो सहित)
चंडीगढ़, 27 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने सोमवार को हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र का ‘‘बहिष्कार’’ करते हुए कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा ने एक प्रस्ताव के माध्यम से लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होने के लिए विपक्षी दल की निंदा करने की कोशिश की। कांग्रेस ने सत्तारूढ़ दल पर निहित स्वार्थों और प्रचार के लिए सदन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।
नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पत्रकारों को बताया कि हरियाणा में कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र का बहिष्कार करने का फैसला किया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार जिस मामले पर चर्चा करना चाहती थी, वह विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्र में भाग न लेकर विपक्षी पार्टी ने अपनी ‘‘महिला विरोधी’’ सोच का प्रदर्शन किया है।
उन्होंने कहा कि सोमवार सुबह अध्यक्ष की अध्यक्षता में विधानसभा की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के दौरान हुड्डा ने यह आशंका जताई थी कि क्या सरकार विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाना चाहती है।
सैनी ने कहा कि हुड्डा को यह स्पष्ट कर दिया गया था कि यह एक आधिकारिक प्रस्ताव है, राजनीतिक प्रस्ताव नहीं, और महिला सशक्तिकरण और संबंधित मुद्दों पर सदन में चर्चा की जाएगी।
कांग्रेस द्वारा सत्र के बहिष्कार के बीच, पार्टी विधायक शैली चौधरी, रेणु बाला और जरनैल सिंह कार्यवाही के दौरान कुछ देर के लिए दिखाई दिए। उन्हें पिछले महीने राज्यसभा चुनावों में कथित तौर पर ‘क्रॉस-वोटिंग’ के आरोप में हाल में निलंबित किया गया था।
विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 2029 तक 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए पिछले दिनों लोकसभा में लाया गया संविधान संशोधन विधेयक खारिज हो गया।
हुड्डा ने पत्रकारों को बताया कि प्रस्ताव की कोई प्रति उन्हें नहीं दी गई और कहा कि पार्टी के विधायक सोमवार को अनुपस्थित रहेंगे और भत्ते का दावा नहीं करेंगे। कांग्रेस ने हरियाणा में भाजपा सरकार के खिलाफ विभिन्न मुद्दों पर विधानसभा भवन के बाहर सांकेतिक सत्र आयोजित किया।
हुड्डा ने पत्रकारों से कहा, ‘‘हम भाजपा के राजनीतिक हथकंडे के लिए विधानसभा मंच का इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं कर सकते। कांग्रेस विधायक दल ने फैसला किया है कि हम सत्र का बहिष्कार करेंगे।’’
कांग्रेस नेता ने कहा कि विधानसभा जनहित के मामलों पर चर्चा और विचार-विमर्श करने का स्थान है, न कि किसी राजनीतिक दल के निर्देशों का पालन करने का। उन्होंने कहा, ‘‘सदन के संचालन में सार्वजनिक धन का इस्तेमाल होता है, जिसे किसी भी पार्टी के कार्यक्रम पर बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए।’’
प्रस्ताव पेश करते हुए सैनी ने कहा कि जब तक महिलाओं को समान अधिकार और अवसर नहीं मिलते, तब तक किसी भी क्षेत्र या समाज को विकसित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण के लिए कई पहल की गई हैं।
विधानसभा में पेश किए गए अपने प्रस्ताव का जिक्र करते हुए सैनी ने कहा, ‘‘यह उस सोच के खिलाफ एक स्पष्ट और सशक्त संदेश है जिसने दशकों से महिलाओं को उनके उचित अधिकारों से वंचित रखा है।’’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को विधानसभा में उपस्थित होकर चर्चा में भाग लेना चाहिए था।
जरनैल सिंह ने सदन में प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे समझ नहीं आता कि कांग्रेस महिलाओं के लिए आरक्षण का विरोध क्यों कर रही है। महिलाओं को सशक्त बनाना और उन्हें हर क्षेत्र में अवसर प्रदान करना हमारा कर्तव्य है। कांग्रेस को सत्र का बहिष्कार नहीं करना चाहिए था, वह इस मुद्दे पर चर्चा कर सकती थी और अपना दृष्टिकोण रख सकती थी…कांग्रेस को अपनी सोच बदलनी चाहिए।’’
भाषा आशीष नरेश
नरेश

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