दिल्ली सरकार ने 400 से अधिक भिखारियों को रेहड़ी पटरी वाले विक्रेता बनने में मदद की

दिल्ली सरकार ने 400 से अधिक भिखारियों को रेहड़ी पटरी वाले विक्रेता बनने में मदद की

दिल्ली सरकार ने 400 से अधिक भिखारियों को रेहड़ी पटरी वाले विक्रेता बनने में मदद की
Modified Date: March 2, 2026 / 07:55 pm IST
Published Date: March 2, 2026 7:55 pm IST

(श्रुति भारद्वाज)

नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में भिक्षावृति पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे सरकारी कार्यक्रम के तहत पिछले डेढ़ वर्षों में 400 से अधिक भिखारियों को प्रशिक्षित किया गया और उनका पुनर्वास कराया गया, जिनमें से कई अब सड़कों पर रेहड़ी पटरी लगाकर सामान बेचने का काम कर रहे हैं और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े हुए हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि ‘स्माइल’ योजना के तहत दिल्ली सरकार ने लगभग 400 भिखारियों को प्रशिक्षित किया और शहर में भीख मांगने में लगे लगभग 4,000 लोगों की पहचान की, जिनमें से लगभग 21 प्रतिशत बुजुर्ग हैं।

उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया की शुरुआत गैर सरकारी संगठनों द्वारा भिखारियों की पहचान किये जाने तथा उन्हें दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के आठ चयनित ‘रैनबसेरों’ में पहुंचाने से हुई, जहां उनकी चिकित्सा जांच की गयी, बुनियादी तौर-तरीके सिखाये गये और उन्हें जरूरी परामर्श दिया गया।

अधिकारी ने कहा, ‘‘उनमें से अधिकतर गरीबी, उम्र या परिवार से बिछड़ने के कारण भीख मांगने के लिए मजबूर हो गए थे। इनमें से कई बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों से आए प्रवासी हैं।

उन्होंने बताया कि इनमें से अधिकतर 35-40 वर्ष से अधिक उम्र के हैं।

अधिकारी ने कहा कि उनकी उम्र और इच्छा को ध्यान में रखकर कौशल प्रशिक्षण में व्यावहारिक और आजीविका-उन्मुख कौशल प्रदान करने पर बल दिया गया।

उन्होंने कहा,‘‘हमने उनमें से अधिकतर को सब्जी या फल बेचने वाले रेहड़ी पटरी वाले के रूप में प्रशिक्षित किया, जबकि कुछ को खाना पकाने, घरेलू काम और बुनियादी पेंटिंग का प्रशिक्षण दिया गया।’’

उन्होंने बताया कि कई लाभार्थियों को प्रशिक्षित कर द्वारका और नजफगढ़ जैसे क्षेत्रों में उनका पुनर्वास किया गया, जहां उन्हें दिल्ली नगर निगम में रेहड़ी पटरी वाले के रूप में पंजीकृत भी कराया गया।

अधिकारी ने बताया कि पंजीकरण से उन्हें उत्पीड़न से सुरक्षा मिली और सरकारी ऋण एवं पेंशन योजनाओं तक उनकी पहुंच संभव हुई। उन्होंने कहा, ‘‘पंजीकरण के बाद, पात्रता के आधार पर उन्हें अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा गया।’’

भाषा राजकुमार नरेश

नरेश


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