दिल्ली सरकार के भर्ती बोर्ड के पास वर्ष 2024 की परीक्षा के प्रश्नपत्र की प्रति नहीं;सीआईसी ने जुर्माना लगाया
दिल्ली सरकार के भर्ती बोर्ड के पास वर्ष 2024 की परीक्षा के प्रश्नपत्र की प्रति नहीं;सीआईसी ने जुर्माना लगाया
नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) को फटकार लगाई है। बोर्ड ने एक आवेदक को वर्ष 2024 की भर्ती परीक्षा के प्रश्न दो साल बाद भी उपलब्ध नहीं कराये और दलील दी कि उसे यह परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी से नहीं मिला है।
सीआईसी ने कहा कि इस स्पष्टीकरण से पता चलता है कि जानकारी उपलब्ध कराने के प्रति ‘इरादे की पूरी तरह कमी’ थी।
मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल ने डीएसएसएसबी के दो केंद्रीय लोक सूचना अधिकारियों (सीपीआईओ) पर ‘‘गंभीर उल्लंघन’’ के लिए 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया और आदेश दिया कि यह राशि उनके वेतन से तीन समान किश्तों में वसूली जाए।
मामला एक अभ्यर्थी द्वारा दायर आरटीआई आवेदन से जुड़ा है, जिसमें उसने एक जून 2024 को आयोजित वरिष्ठ निजी सहायक और निजी सहायक टियर-दो विषयनिष्ठ परीक्षा के अपने उत्तर पत्रक, ऑनलाइन प्रश्नपत्र और अपने उत्तरों की प्रतियां मांगी थीं।
गोयल ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आयोग यह देखकर ‘‘हैरान है कि सीपीआईओ ने किस प्रकार की उदासीनता के साथ जवाब दिए हैं’’ और यह ‘‘संदेह से परे स्पष्ट है कि सीपीआईओ ने यह सुनिश्चित करने की भी जहमत नहीं उठाई कि उनके उत्तर आरटीआई अधिनियम के अनुरूप हों।’’
आयोग ने उल्लेख किया कि शुरुआत में आवेदक को बताया गया कि मांगी गई जानकारी संबंधित शाखाओं से जुड़ी नहीं है, बाद में अधिकारियों ने बिना आरटीआई अधिनियम के किसी प्रावधान का हवाला दिए ‘‘मनमाने ढंग से सूचना देने से इनकार कर दिया।’’
सीआईसी ने यह भी कहा कि 2024 की परीक्षा का प्रश्नपत्र ‘‘2026 तक भी परीक्षा कराने वाली एजेंसी से प्राप्त नहीं होने का दावा किया जाना जानकारी उपलब्ध कराने के प्रति पूर्ण उदासीनता’’ को दर्शाता है।
सीआईसी ने कहा कि ‘‘परीक्षा आयोजित करने के लिए एक एजेंसी नियुक्त करने वाला डीएसएसएसबी यह दलील नहीं दे सकता कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी से रिकॉर्ड दो वर्ष बीत जाने के बावजूद प्राप्त नहीं किया जा सका,’’ जबकि 2024 में ही रिकॉर्ड हासिल करने के लिए प्रयास किए जाने का कोई प्रमाण भी प्रस्तुत नहीं किया गया।
आयोग ने माना कि अधिकारियों का यह आचरण आवेदक के सूचना के अधिकार में ‘‘जानबूझकर और सुनियोजित रूप से बाधा उत्पन्न करने’’ के समान है।
मामले की सुनवाई के दौरान एक नव नियुक्त परीक्षा शाखा अधिकारी ने 30 अप्रैल को ईमेल भेजकर प्रश्नपत्र मंगाये और एजेंसी ने उसे उसी दिन उपलब्ध करा दिया।
आयोग ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि ‘‘पूर्व सीपीआईओ द्वारा ऐसा कोई प्रयास नहीं किया गया था।’’
आवेदक की विषयनिष्ठ उत्तर पुस्तिका के अनुरोध पर आयोग ने कहा कि सीपीआईओ ने गलत तरीके से एक आंतरिक बोर्ड नीति का सहारा लेकर सूचना देने से इनकार किया और वह आरटीआई अधिनियम की धारा 22 से अनभिज्ञ प्रतीत होते हैं।’’
आयोग ने सुनवायी के दौरान अधिकारियों के आचरण की भी आलोचना की और कहा कि एक सीपीआईओ ‘‘उदासीन रहा’’, किसी भी अधिकारी ने उसके अंतरिम आदेश पर ध्यान नहीं दिया, और आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों के प्रति उनका रवैया इस मामले में ‘‘जानबूझकर की गई अवहेलना’’ जैसा प्रतीत होता है।
भाषा अमित संतोष
संतोष

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