दिल्ली सरकार के निलंबित अधिकारी खाखा की पत्नी ने अदालत में जमानत याचिका दायर की
दिल्ली सरकार के निलंबित अधिकारी खाखा की पत्नी ने अदालत में जमानत याचिका दायर की
नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) नाबालिग लड़की के साथ कई बार बलात्कार करने और उसे गर्भवती करने के आरोपी एवं दिल्ली सरकार के निलंबित अधिकारी प्रेमोदय खाखा की पत्नी ने दिल्ली उच्च न्यायालय से इस मामले में उसे जमानत देने की बृहस्पतिवार को अपील की।
सीमा रानी खाखा की ओर से पेश वकील ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष कहा कि उनकी मुवक्किल अगस्त 2023 से हिरासत में है और उसे बलात्कार के लिए उकसाने के अपराधों से बरी कर दिया गया है।
वकील ने बताया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा पिछले साल जमानत के लिए अधीनस्थ अदालत में जाने के लिए कहे जाने के बाद, यह उच्च न्यायालय में उसकी दूसरी नियमित जमानत याचिका है।
पुलिस के वकील ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि नाबालिग की मां का अभी तक अधीनस्थ अदालत में बयान दर्ज नहीं हुआ है और आशंका है कि आरोपी उसे प्रभावित कर सकता है क्योंकि वे दोनों एक ही गिरजाघर में जाते हैं।
उन्होंने कहा कि अधीनस्थ अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए एक विस्तृत आदेश पारित किया है।
अदालत ने कहा कि वह मामले में दलीलें सुनने के लिए तैयार है, लेकिन उसने खाखा के वकील के अनुरोध पर सुनवाई चार मई तक के लिए स्थगित कर दी।
वकील ने कहा कि वह सुनवाई के दौरान अदालत में स्वयं उपस्थित रहना चाहते हैं।
प्रेमोदय खाखा पर नवंबर 2020 और जनवरी 2021 के बीच अपने एक परिचित व्यक्ति की नाबालिग बेटी के साथ कई बार बलात्कार करने का आरोप है और अगस्त 2023 में गिरफ्तारी के बाद से वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है।
आरोप है कि अधिकारी की पत्नी ने लड़की को गर्भपात कराने के लिए दवाइयां दीं। वह न्यायिक हिरासत में है।
उच्च न्यायालय ने पिछले साल इस मामले में अधिकारी के खिलाफ आरोप तय करने के फैसले को बरकरार रखा था।
हालांकि, इसने बलात्कार और यौन उत्पीड़न के अपराध में सहायता करने के आरोप में सीमा रानी खाखा के खिलाफ लगे आरोपों को खारिज कर दिया।
पीड़िता द्वारा अस्पताल में मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना बयान दर्ज कराने के बाद पति-पत्नी को अगस्त 2023 में गिरफ्तार किया गया था।
यह मामला पॉक्सो अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया था।
उच्च न्यायालय ने सितंबर 2024 में सीमा रानी खाखा की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि मामला ‘‘दो परिवारों के बीच विश्वास की नींव पर आघात करता है’’ और इस स्तर पर गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
उच्चतम न्यायालय ने 24 जनवरी, 2025 को उसे एक वर्ष बाद जमानत के लिए निचली अदालत में अपील करने की छूट प्रदान की थी।
भाषा
देवेंद्र सिम्मी
सिम्मी

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