Artemis-II Launch Live Video: 54 सालों बाद क्या NASA दोहरा पायेगा इतिहास?.. चाँद पर जीवन तलाशने की बड़ी कोशिश, लांच हुआ आर्टेमिस-।।, देखें Video

Artemis-II Launch Live Video: नासा का आर्टेमिस-2 मिशन लॉन्च, 54 साल बाद इंसान चांद के पास जाएंगे, भविष्य के मून मिशन की तैयारी।

Artemis-II Launch Live Video: 54 सालों बाद क्या NASA दोहरा पायेगा इतिहास?.. चाँद पर जीवन तलाशने की बड़ी कोशिश, लांच हुआ आर्टेमिस-।।, देखें Video

Artemis-II Launch Live Video || Image- NASA File

Modified Date: April 2, 2026 / 07:28 pm IST
Published Date: April 2, 2026 7:27 pm IST
HIGHLIGHTS
  • 54 साल बाद चांद मिशन की नई शुरुआत
  • आर्टेमिस-2 सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ
  • चार अंतरिक्ष यात्री करेंगे चांद की परिक्रमा

वाशिंगटन डीसी: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का मून मिशन अर्टेमिस-2 (Artemis II) बुधवार शाम सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया। करीब 54 साल बाद यह पहला मौका है जब इंसानों को चांद के पास ले जाने का मिशन शुरू हुआ है। (Artemis-II Launch Live Video) फिलहाल रॉकेट पृथ्वी की कक्षा में घूम रहा है और इसके बाद ‘ट्रांसलूनर इंजेक्शन’ के जरिए इसे चांद की ओर भेजा जाएगा। अंतरिक्ष यान के ओरियन स्पेसक्रॉफ्ट में मौजूद चार अंतरिक्ष यात्री इसकी गति और सिस्टम की जांच कर रहे हैं। सभी सोलर पैनल सही तरीके से खुल गए हैं, जिससे मिशन को ऊर्जा मिलती रहेगी।

कौन 4 अंतरिक्ष यात्री है इस कठिन यात्रा में शामिल?

यह मिशन दिसंबर 1972 के अपोलो-17 के बाद पहली बार है, जब इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर निकले हैं। इस 10 दिन के मिशन में अंतरिक्ष यात्री चांद पर नहीं उतरेंगे, लेकिन उसके चारों ओर यात्रा करेंगे। इस मिशन में क्रिस्टीना कोच पहली महिला और विक्टर ग्लोवर पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री होंगे, जो इस क्षेत्र तक जाएंगे। वहीं जेरेमी हानसेन पहले गैर-अमेरिकी होंगे, जो इस मिशन का हिस्सा हैं।

क्या है इस मिशन का मकसद?

मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद के दूसरी तरफ तक जाएंगे और पृथ्वी से करीब 4 लाख किलोमीटर दूर पहुंच सकते हैं, जो एक नया रिकॉर्ड होगा। यह मिशन भविष्य में चांद पर इंसानों को उतारने और वहां बेस बनाने की तैयारी का अहम हिस्सा है। (Artemis-II Launch Live Video) आने वाले समय में आर्टेमिस-5 जैसे मिशन के जरिए चांद की सतह पर फिर से इंसानों को भेजने की योजना है।

कैसा होगा अंतरिक्ष यात्रिओं का सफर?

पूरे मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत, रेडिएशन और माइक्रोग्रैविटी के असर पर नजर रखी जाएगी। उन्हें एक छोटे कैप्सूल में करीब 10 दिन तक साथ रहना होगा, जो किसी छोटे कमरे जितना ही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मिशन भविष्य के बड़े अंतरिक्ष अभियानों की नींव साबित होगा और इंसानों के चांद पर दोबारा कदम रखने का रास्ता आसान करेगा।

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