धूल प्रदूषण पर दिल्ली सरकार सख्त, निर्माण स्थलों पर 100 जीएसएम वाली जाली अनिवार्य
धूल प्रदूषण पर दिल्ली सरकार सख्त, निर्माण स्थलों पर 100 जीएसएम वाली जाली अनिवार्य
नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) दिल्ली सरकार ने धूल प्रदूषण नियंत्रण उपायों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए राजधानी के सभी निर्माण और तोड़फोड़ (सीएंडडी) स्थलों पर उच्च घनत्व वाली धूल-रोधी जाली लगाना अनिवार्य कर दिया है।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने निर्देश जारी किए हैं कि निर्माण और तोड़फोड़ स्थलों पर उपयोग की जाने वाली हरी जाली की न्यूनतम मोटाई 100 जीएसएम (ग्राम प्रति वर्ग मीटर) होनी चाहिए और सभी परियोजना संचालकों को तत्काल प्रभाव से इस मानक का पालन करना होगा।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, ‘‘वायु प्रदूषण के विरुद्ध दिल्ली की लड़ाई तत्परता, गंभीरता और समग्र सरकारी दृष्टिकोण के साथ लड़ी जा रही है। हम नीतिगत बदलाव, वैज्ञानिक हस्तक्षेप, प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी और कड़े प्रवर्तन— सभी मोर्चों पर काम कर रहे हैं, ताकि दिल्ली में वायु प्रदूषण के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया जा सके।’’
अधिकारियों ने बताया कि यह निर्णय निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों के धूल प्रदूषण में योगदान को देखते हुए लिया गया है और यह वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के उन निर्देशों के अनुपालन में भी है, जिनमें निर्माण और तोड़फोड़ परियोजनाओं के लिए धूल प्रदूषण नियंत्रण एवं निरीक्षण की मानक संचालन प्रक्रियाएं निर्धारित की गई थीं।
सरकार के अनुसार, पहले के नियमों में निर्माण स्थलों पर निर्माणाधीन संरचनाओं और रखी गई निर्माण सामग्री के चारों ओर तिरपाल या हरी जाली लगाना आवश्यक था, लेकिन जाली के लिए कोई न्यूनतम तकनीकी मानक निर्धारित नहीं था।
नए आदेश के साथ सरकार ने 100 जीएसएम को न्यूनतम मानक के रूप में तय किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धूल अवरोधक पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कणों को उनके स्रोत पर ही रोकने में प्रभावी हों।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने दिल्ली नगर निगम, नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद, दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली मेट्रो रेल निगम, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग और लोक निर्माण विभाग सहित संबंधित एजेंसियों को आदेश के तत्काल क्रियान्वयन हेतु निर्देश जारी किए हैं।
भाषा खारी सुरेश
सुरेश

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