दिल्ली: पुलिस ने डीएसईयू की व्याख्याता के यौन उत्पीड़न मामले में प्राथमिकी दर्ज की
दिल्ली: पुलिस ने डीएसईयू की व्याख्याता के यौन उत्पीड़न मामले में प्राथमिकी दर्ज की
नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) दिल्ली पुलिस ने सोमवार को सरकार के स्वामित्व वाले दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय (डीएसईयू) की एक महिला व्याख्याता की शिकायत पर उत्पीड़न और वेतन में देरी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की।
यह प्राथमिकी सात जनवरी को दिल्ली की एक अदालत के आदेश पर दर्ज की गई।
महिला की शिकायत पर द्वारका (दक्षिण) थाने में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
महिला ने उसके सेवा रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचाने, यौन और प्रशासनिक उत्पीड़न का भी आरोप लगाया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय द्वारा वेतन वितरण का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के बाद भुगतान में बार-बार देरी हुई, जिससे वह आर्थिक संकट में फंस गई और उसे ऋण का भुगतान करने में चूक का सामना करना पड़ा और उस पर भारी जुर्माना लगाया गया।
द्वारका अदालत ने सात जनवरी को दिये एक आदेश में कहा कि आरोप संज्ञेय अपराध हैं और पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच करने का निर्देश दिया। पुलिस ने तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 509 और 34 के तहत मामला दर्ज किया है।
डीएसई के कुलपति अशोक नागवत ने आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और दावा किया कि शिकायत किसी गलत इरादे से की गई है।
नागवत ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “हमें पता है कि शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह हम पर दबाव बनाने की कोशिश है। हम जल्द ही पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे और जरूरत पड़ने पर मानहानि का मुकदमा भी दायर कर सकते हैं, क्योंकि आरोप पूरी तरह निराधार हैं।”
शिकायत के अनुसार, 20 साल से अधिक सेवारत एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी व व्याख्याता ने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2023 से फरवरी 2024 के बीच उन्हें अपने बकाया वेतन और लंबित प्रतिपूर्ति के लिए बार-बार उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि फरवरी 2024 में पुलिस से संपर्क करने के बावजूद कोई मामला दर्ज नहीं किया गया।
अप्रैल 2024 में विश्वविद्यालय ने उन्हें निलंबित कर दिया, जिसे उन्होंने उन्हें चुप कराने के लिए प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया।
पीड़ित महिला ने कहा कि आंतरिक जांच के बाद एक अक्टूबर 2024 को निलंबन रद्द कर दिया गया।
प्राथमिकी के अनुसार, एक प्रमुख आरोप उनकी निजी फाइल और सेवा पुस्तिका के रिकॉर्ड की स्थिति से संबंधित है, जो वेतन, पदोन्नति और सेवानिवृत्ति लाभों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
व्याख्याता ने दावा किया कि जब वह इन दस्तावेजों को लेने के लिए विश्वविद्यालय परिसर गईं, तो उन्हें वह फटा हुआ और क्षतिग्रस्त मिला और रिकॉर्ड नष्ट होने के डर से उन्होंने पुलिस को सहायता के लिए बुलाया।
महिला ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें क्षतिग्रस्त रिकॉर्ड स्वीकार करने के लिए मजबूर करने का प्रयास किया और अगर वह शिकायतें उठाती रहीं तो उन्हें इस्तीफा देने की सलाह दी।
उन्होंने डीएसईयू अधिकारियों पर आपराधिक साजिश, धमकी और सरकारी संपत्ति को जानबूझकर नष्ट करने का आरोप लगाया।
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि सेवा रिकॉर्ड को कोई भी नुकसान उनके वर्तमान और भविष्य के रोजगार को अपरिवर्तनीय रूप से प्रभावित कर सकता है।
भाषा जितेंद्र प्रशांत
प्रशांत


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