दिल्ली न्यायाधिकरण ने दुर्घटना के शिकार मार्कोस गोताखोर को 2.46 करोड़ मुआवजा देने का आदेश दिया

दिल्ली न्यायाधिकरण ने दुर्घटना के शिकार मार्कोस गोताखोर को 2.46 करोड़ मुआवजा देने का आदेश दिया

दिल्ली न्यायाधिकरण ने दुर्घटना के शिकार मार्कोस गोताखोर को 2.46  करोड़ मुआवजा देने का आदेश दिया
Modified Date: June 25, 2026 / 05:00 pm IST
Published Date: June 25, 2026 5:00 pm IST

नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 2018 में सड़क दुर्घटना में 88 प्रतिशत तक अशक्त हो गए नौसेना के एक मार्कोस (मरीन कामंडर) गोताखोर को करीब 2.46 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

पीठासीन अधिकारी अभिलाष मल्होत्रा आईएनएस कर्ण में तैनात मरीन कमांडो और गोताखोर लखपत सिंह की दावा याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। लखपत सिंह ने दावा किया कि वह छुट्टी पर थे और 25 दिसंबर 2018 को मोटरसाइकिल से जा रहे थे, तभी तेजी और लापरवाही से चलाई जा रही एक कार ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।

सिंह का पक्ष रखने के लिए पेश हुए अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल की हादसे के समय महज 23 साल उम्र थी और वह उस दुर्घटना की वजह से स्थायी रूप से 88 प्रतिशत तक अशक्त हो गए हैं।

न्यायाधिकरण ने छह जून को दिये आदेश में कहा, ‘‘रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों से स्पष्ट होता है कि याचिकाकर्ता (सिंह) एक मार्कोस गोताखोर थे, जिन्होंने कमांडो बनने के लिए गोताखोरी के कई प्रशिक्षण लिये थे। उन्हें अपने कूल्हे के हिस्से और दाहिने हाथ व पैर के ऊपरी और निचले हिस्सों में 88 प्रतिशत अशक्तता का सामना करना पड़ा है।’’

आदेश में कहा गया कि चोटों की प्रकृति से स्पष्ट होता है कि याचिकाकर्ता अब मरीन कमांडो या गोताखोर के तौर पर काम नहीं कर पाएगा।

न्यायाधिकरण ने इस तथ्य को संज्ञान में लिया कि चोटों के कारण याचिकाकर्ता की सेवा अवधि कम हो गई।

उसने कहा, ‘‘यह बताया गया है कि याचिकाकर्ता अभी विभाग द्वारा दिए गए दो सहायकों की मदद से कार्यालयी कार्य कर रहा है और चोटों की प्रकृति के कारण कोई दूसरा काम नहीं कर पाएगा।’’

न्यायाधिकरण ने सामने रखे गए साक्ष्यों पर संज्ञान लेते हुए कहा कि सिंह एक पेशेवर गोताखोर थे और भारतीय नौसेना में काम करते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद भी वह इसी तरह के क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकते थे, लेकिन दुर्घटना के कारण वह 88 प्रतिशत तक अशक्त हो गए हैं। इसलिए, वे अब तैराकी या अपने पेशे और कौशल से जुड़ा कोई भी दूसरा काम नहीं कर पाएंगे।

कार का बीमा करने वाली कंपनी मे/एस रॉयल सुंदरम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने कहा है कि वह चालक द्वारा लापरवाही से वाहन चलाने के दावे का प्रतिवाद नहीं कर रही है।

इसके बाद न्यायाधिकरण ने रेखांकित किया कि यह दुर्घटना कार चालक की लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण हुई थी। न्यायाधिकरण ने इसके बाद बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को विभिन्न मदों के तहत 2.46 करोड़ रुपये का मुआवजा दे।

भाषा धीरज मनीषा

मनीषा


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