सुरक्षा चिंताओं के बीच दिल्ली के ई-रिक्शा चालकों को ऐप-आधारित ‘बैटरी शटडाउन’ का डर
सुरक्षा चिंताओं के बीच दिल्ली के ई-रिक्शा चालकों को ऐप-आधारित ‘बैटरी शटडाउन’ का डर
नयी दिल्ली, तीन जुलाई (भाषा) दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों के आसपास परिचालन करने वाले कई ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि वे इन दिनों भय की स्थिति में काम कर रहे हैं।
उनका आरोप है कि एक स्मार्टफोन ऐप के जरिए बिना किसी चेतावनी के उनके ई-रिक्शों को बीच सड़क में ही बंद कर दिया जाता है, जिससे वे तेज रफ्तार वाहनों के बीच फंस जाते हैं और यात्रियों की सुरक्षा भी गंभीर खतरे में पड़ जाती है।
यह मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए, जिनमें कथित तौर पर एक चीनी ब्लूटूथ-सक्षम बैटरी प्रबंधन ऐप के जरिए अनुकूल लिथियम-आयन बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शों को दूर से बंद करते हुए दिखाया गया।
इन वीडियो के सामने आने के बाद दिल्ली सरकार ने इन दावों की जांच के आदेश दिए हैं।
दिल्ली के कुछ सबसे व्यस्त मार्गों पर ई-रिक्शा चलाने वाले चालकों ने पीटीआई-भाषा से कहा कि यदि मुख्य सड़कों पर ई-रिक्शा अचानक बंद हो जाए, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है, क्योंकि तेज रफ्तार वाहन अक्सर उनके ठीक पीछे चलते हैं और ई-रिक्शा चालकों को संभलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
पंजाबी बाग पश्चिम मेट्रो स्टेशन और पीरागढ़ी मेट्रो स्टेशन के बीच यात्रियों को लाने-ले जाने वाले ई-रिक्शा चालक श्रीराम ने बताया कि इस मार्ग पर पूरे दिन भारी यातायात रहता है और ई-रिक्शा चालकों को दोनों छोर पर यात्रियों के इंतजार में रुकना पड़ता है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने सुना है कि कई ई-रिक्शा मुख्य सड़क पर अचानक बंद हो गए। जब कोई वाहन बीच सड़क में रुक जाता है तो स्थिति खतरनाक हो जाती है, क्योंकि पीछे से तेज रफ्तार वाहन आ रहे होते हैं।’’
राम ने कहा कि ऐसी स्थिति यात्रियों और चालकों, दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें हर समय इस बात का डर बना रहता है कि कहीं पीछे से कोई वाहन हमारी गाड़ी में टक्कर न मार दे।’’
वेस्ट एन्क्लेव और पीतमपुरा के बीच ई-रिक्शा चलाने वाले अंकुश कुमार ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि बार-बार ई-रिक्शा बंद होने की वजह बैटरी में खराबी है।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा ई-रिक्शा बार-बार बंद हो रहा था। मुझे लगा कि बैटरी में खराबी है और उसकी जांच कराने पर 500 रुपये खर्च किए, लेकिन कोई समस्या नहीं मिली। बाद में पता चला कि यह सब उस चीनी ऐप की वजह से हो रहा है। जब ई-रिक्शा बीच रास्ते में बंद हो जाता है तो यात्री किराया दिए बिना दूसरी गाड़ी में बैठ जाते हैं। जो कुछ लोगों को मजाक लगता होगा, वह हमारे लिए सड़क पर जानलेवा साबित हो सकता है।’’
कुमार ने कहा कि इस वजह से चालकों को केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं हो रहा, बल्कि भीड़भाड़ वाले यातायात में वाहन चलाते समय वे लगातार मानसिक तनाव में भी रहते हैं।
खबरों के अनुसार, ई-रिक्शों में इस्तेमाल होने वाले कुछ लिथियम-आयन बैटरी पैक ब्लूटूथ-सक्षम बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) से लैस होते हैं, जिनकी निगरानी विशेष मोबाइल ऐप के माध्यम से की जा सकती है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ बैटरी प्रणालियों में पर्याप्त प्रमाणीकरण की व्यवस्था नहीं होती, जिससे ब्लूटूथ की सीमा के भीतर मौजूद कोई भी व्यक्ति उनसे जुड़कर बैटरी की डिस्चार्ज प्रणाली को निष्क्रिय कर सकता है। इससे ई-रिक्शा अचानक रुक जाता है। हालांकि, लेड-एसिड बैटरी से चलने वाले पुराने ई-रिक्शे आमतौर पर इस समस्या से प्रभावित नहीं होते।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए, जिनमें कंटेंट क्रिएटर चलते या खड़े ई-रिक्शों के पास जाकर उनकी अनुकूल बैटरियों से जुड़ते और दूर से ही वाहनों को बंद करते हुए दिखाई दिए।
इन वीडियो की सोशल मीडिया पर व्यापक आलोचना हुई। कई उपयोगकर्ताओं ने चेतावनी दी कि इस तरह की हरकतें घातक सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं।
कोहाट एन्क्लेव-नेताजी सुभाष प्लेस मार्ग पर ई-रिक्शा चलाने वाले मोहम्मद सिराज ने दावा किया कि कुछ लोग इस एेप के जरिए बैटरियों को कथित तौर पर ‘लॉक’ कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग ऐप के जरिये बैटरी लॉक कर रहे हैं। अब ई-रिक्शा चालकों को भी आपात स्थिति में उसे ‘अनलॉक’ करने के लिए वही ऐप डाउनलोड करना पड़ रहा है। कई बार केवल उसी व्यक्ति के पास बैटरी ‘अनलॉक’ करने का विकल्प होता है, जिसके मोबाइल में यह ऐप मौजूद है। इससे चालकों को भारी परेशानी हो रही है। यदि मुख्य सड़क पर ई-रिक्शा बंद हो जाए तो यह बड़ा सुरक्षा जोखिम बन जाता है। पुलिस को ऐसे ऐप का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।’’
इस बीच, दिल्ली सरकार ने परिवहन विभाग को इन दावों की सत्यता की जांच करने और इससे जुड़े सुरक्षा पहलुओं का परीक्षण करने का निर्देश दिया है।
भाषा
राखी नेत्रपाल
नेत्रपाल

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