कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास की देखरेख करने वाली समिति को फिर से गठित करने की मांग

कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास की देखरेख करने वाली समिति को फिर से गठित करने की मांग

कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास की देखरेख करने वाली समिति को फिर से गठित करने की मांग
Modified Date: June 13, 2026 / 04:21 pm IST
Published Date: June 13, 2026 4:21 pm IST

श्रीनगर, 13 जून (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर असलम वानी ने शनिवार को कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास की देखरेख करने वाली समिति को फिर से गठित करने की मांग की।

वर्ष 2009 में जम्मू-कश्मीर की तत्कालीन सरकार ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास की देखरेख के लिए तथा केंद्र द्वारा घोषित पुनर्वास उपायों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक समिति का गठन किया था।

उस समय भी उमर अब्दुल्ला ही मुख्यमंत्री थे।

इस समिति में सरकार के प्रतिनिधि और कई कश्मीरी पंडित संगठनों के सदस्य शामिल थे।

वानी ने विदेशों में रहने वाले कश्मीरी पंडितों के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 2014 में भंग की गई समिति को फिर से गठित करने का समय आ गया है।

वानी ने कहा, “यह सम्मेलन ठीक है लेकिन इसके अलावा हमें साथ बैठकर बात करनी होगी। आपकी तरफ से कुछ प्रतिनिधि और हमारी तरफ से कुछ प्रतिनिधि आपस में बात करेंगे तथा (कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए) कोई रास्ता निकालेंगे। मुझे लगता है कि सरकारी स्तर पर समिति को फिर से बहाल करने की जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों की अपनी मातृभूमि में सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी के लिए रूपरेखा तैयार करने के मकसद से उस समिति को फिर से बहाल करने का समय आ गया है।

वानी ने कहा, “समिति आपके समुदाय से बात करेगी और फैसले लेगी।”

उन्होंने कहा, “हम मुख्यमंत्री व उपराज्यपाल से भी बात करेंगे और जल्द ही इस समिति का पुनर्गठन करेंगे।”

मुख्यमंत्री के सलाहकार ने कहा कि 1990 में घाटी में उग्रवाद के बढ़ने से न केवल कश्मीरी पंडित बल्कि मुसलमान भी प्रभावित हुए थे।

उन्होंने जोर देकर कहा, “1990 के तूफान ने सभी को प्रभावित किया। इसने दोनों समुदायों पर असर डाला और इसका समाधान भी मिलकर ही निकलेगा।”

वानी ने माना कि यह एक सच्चाई है कि लोगों का एक वर्ग ऐसा है, जो शांति नहीं चाहता।

उन्होंने कहा, “वे 1947 के फैसले (जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय) से सहमत नहीं थे। लेकिन हमारे जैसे लोग भी थे। आप सभी पर एक जैसा आरोप नहीं लगा सकते। ऐसे लोग भी हैं जिनके दिल तब भी आपके लिए धड़कते थे और आज भी धड़कते हैं। संतों की यह घाटी पंडितों की वापसी के बिना अधूरी है।”

अधिकारी ने कहा कि सरकार ने पंडितों को वापस लाने के लिए अपने स्तर पर कोशिश की है।

भाषा जितेंद्र पवनेश

पवनेश


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