अवैध प्रवासन के कारण जनसांख्यिकीय परिवर्तन सीमावर्ती क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं: गृह मंत्रालय

अवैध प्रवासन के कारण जनसांख्यिकीय परिवर्तन सीमावर्ती क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं: गृह मंत्रालय

अवैध प्रवासन के कारण जनसांख्यिकीय परिवर्तन सीमावर्ती क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं: गृह मंत्रालय
Modified Date: May 27, 2026 / 06:09 pm IST
Published Date: May 27, 2026 6:09 pm IST

नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) अवैध प्रवासन के कारण होने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तन केवल सीमावर्ती क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका प्रभाव अब विस्तृत हो गया है, जो ‘‘शहरी केंद्रों, औद्योगिक गलियारों, जनजातीय क्षेत्रों और अन्य सामाजिक एवं आर्थिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है।’’ सरकार की एक अधिसूचना में यह बात कही गयी है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता में जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर एक उच्च स्तरीय समिति (एचएलसीडीसी) के गठन के संबंध में कहा गया है कि अवैध प्रवासन के कारण जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से ‘‘व्यापक चुनौतियां’’ उत्पन्न हुई हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘‘अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों’’ से देशभर में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का व्यापक आकलन करने के लिए समिति गठित करने की घोषणा की थी।

नयी दिल्ली में मुख्यालय वाली इस समिति में जनगणना आयुक्त के साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव सदस्य होंगे। साथ ही, डॉ. शमिका रवि भी सदस्य होंगी। यह समिति एक साल में अपनी रिपोर्ट देगी।

शाह ने मंगलवार को कहा था, ‘‘संयुक्त सचिव (विदेशी-1), गृह मंत्रालय, इस समिति के सदस्य सचिव होंगे।’’

अधिसूचना में कहा गया है कि देश के कुछ क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन देखे गए हैं, जो ‘‘सामान्य प्रजनन या मृत्यु दर के रुझानों के कारण नहीं हैं’’ बल्कि ‘‘अवैध प्रवासन, अनियमित जनसंख्या गतिशीलता और प्रशासनिक शिथिलता’’ जैसे बाहरी असामान्य कारकों के कारण उभर रहे हैं।

इसमें कहा गया, ‘‘हालांकि ये बदलाव मुख्य रूप से सीमावर्ती जिलों में केंद्रित हैं, लेकिन इनका प्रभाव इन क्षेत्रों से आगे बढ़कर शहरी केंद्रों, औद्योगिक गलियारों, आदिवासी क्षेत्रों और अन्य सामाजिक और आर्थिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को भी प्रभावित कर रहा है, जिससे सार्वजनिक सेवा, स्थानीय शासन, संसाधन वितरण और सामाजिक सामंजस्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।’’

अधिसूचना में कहा गया है कि मौजूदा संस्थागत ढांचा इस तरह के जनसांख्यिकीय बदलावों का समन्वित, साक्ष्य-आधारित और समयबद्ध मूल्यांकन करने तथा उन पर कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं है।

इसमें कहा गया है, ‘‘…इसलिए, भारत सरकार गृह मंत्रालय के अधीन जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का संकल्प लेती है, जो देश भर में हो रहे ऐसे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों की प्रकृति, कारणों और परिणामों का वैज्ञानिक अध्ययन करेगी और उचित नीतिगत, प्रशासनिक और कानूनी उपायों की सिफारिश करेगी।’’

समिति को अवैध प्रवासन सहित जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से उत्पन्न चुनौतियों पर व्यापक विचार-विमर्श करने के बाद एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का कार्य सौंपा गया है।

यह समिति जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के संभावित कारणों का अध्ययन करेगी, जैसे कि प्रजनन दर में भिन्नता, सीमा पार आवागमन (अवैध आप्रवासन सहित), आर्थिक अवसर और अन्य सामाजिक-पर्यावरणीय कारक, साथ ही परिवर्तनों के पीछे अंतर्निहित कारक, जिनमें अवैध प्रवासन, असामान्य बसावट पैटर्न और नियोजित प्रवासन शामिल हैं।

अधिसूचना में कहा गया है कि समिति सीमा प्रबंधन, जनसंख्या स्थिरीकरण और ऐसी प्रवृत्तियों की निरंतर निगरानी के लिए पहचान प्रणालियों को मजबूत करने के संबंध में एक संस्थागत तंत्र की सिफारिश भी करेगी। इसके अलावा, समिति ऐसे मामलों में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए एक व्यापक नीतिगत ढांचे का प्रस्ताव भी देगी।

भाषा आशीष नरेश

नरेश


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