विभिन्न विचारों और दृष्टिकोणों को व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए : न्यायमूर्ति नागरत्ना
विभिन्न विचारों और दृष्टिकोणों को व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए : न्यायमूर्ति नागरत्ना
नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश बी.वी. नागरत्ना ने बृहस्पतिवार को कहा कि भिन्न-भिन्न विचारों और दृष्टिकोणों पर गौर किया जाना चाहिए तथा उन्हें व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
न्यायमूर्ति नागरत्ना वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह के संस्मरण ‘‘दि कांस्टीट्यूशन इज माई होम’’ के विमोचन के अवसर पर बोल रही थीं।
उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बहुत महत्वपूर्ण है। विभिन्न विचारों और दृष्टिकोणों पर गौर किया जाना चाहिए और उन्हें व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए।”
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था लेकिन वह कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके।
उन्होंने पुस्तक विमोचन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए एक वीडियो क्लिप भेजा और ‘ब्रिक्स’ न्यायाधीशों की आगामी बैठक के कारण उपस्थित नहीं होने पर खेद जताया।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि जयसिंह हाशिए पर पड़े समुदाय से संबंधित मुद्दों को उठाने में अग्रणी रही हैं।
उन्होंने कहा, “पुस्तक का शीर्षक बहुत कुछ कहता है। ज्यादातर वकील किसी मामले के दौरान कभी-कभार या नियमित रूप से संविधान का अध्ययन करते हैं, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि जयसिंह ने इसे अपना स्थायी निवास बना लिया है।’’
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि हालांकि कानून का पेशा अत्यधिक प्रतिस्पर्धी हो सकता है, लेकिन सबसे स्थायी प्रगति उस वक्त हुई जब महिलाओं ने एकजुटता को चुना।
उन्होंने कहा, “कई पीढ़ियों से, कानून के पेशे में पुरुषों को जान-पहचान, सिफारिश और पेशेवर प्रायोजन से लाभ मिलता रहा है।’’
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि इसके विपरीत, महिलाएं अधिकतर मामलों में ऐसे नेटवर्क के बिना इस पेशे में आई हैं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि इस पेशे में महिलाओं के बीच परस्पर संबंध बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि हालांकि वरिष्ठ महिला वकीलों ने बहुत कुछ हासिल किया है, लेकिन बार में वरिष्ठों से मार्गदर्शन बहुत महत्वपूर्ण है।
भाषा अविनाश सुभाष
सुभाष

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