द्रमुक नेता आर एस भारती ने स्टालिन पर ‘अशोभनीय’ महामारी टिप्पणी को लेकर पलानीस्वामी की निंदा की
द्रमुक नेता आर एस भारती ने स्टालिन पर 'अशोभनीय' महामारी टिप्पणी को लेकर पलानीस्वामी की निंदा की
चेन्नई, नौ अप्रैल (भाषा) अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पाडी. के. पलानीस्वामी द्वारा मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के खिलाफ हाल ही में की गई टिप्पणियों पर ताजा हमला बोलते हुए, द्रमुक के वरिष्ठ नेता आर एस भारती ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि विपक्षी नेता की ‘अशोभनीय’ बयानबाजी सत्तारूढ़ पार्टी के लिए बढ़ते जनसमर्थन से उपजे असंतोष से उपजी थी।
पलानीस्वामी ने आठ अप्रैल को चेन्नई में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पूछा था: ‘द्रमुक शासन के दौरान क्या सूखा, बाढ़ या चक्रवात आया था? या कोरोना वायरस महामारी फैली थी? कुछ भी नहीं हुआ था; अगर यह (महामारी) फैलती, तो वह महामारी में ही मर जाते।’
मई 2021 में जब द्रमुक ने सत्ता संभाली, तब राज्य महामारी की दूसरी लहर की चपेट में था, जबकि पहली लहर अन्नाद्रमुक शासन के दौरान सामने आई थी।
भारती ने कहा कि जहां पलानीस्वामी महामारी के दौरान ‘छिपे’ हुए थे, वहीं स्टालिन ने लोगों में विश्वास जगाने के लिए कोयंबटूर के अस्पताल वार्डों का दौरा करके अपनी जान जोखिम में डाली।
भारती ने कहा, ‘यह सर्वविदित है कि कोरोना काल के दौरान, जब एडप्पाडी जैसे लोग बाहर निकलने से डरते थे, तब हमारे नेता ने मुख्यमंत्री का पदभार संभालने के बाद कोयंबटूर अस्पताल के वार्डों में प्रवेश किया, जबकि डॉक्टरों और अन्य लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी।’
भारती ने कहा, ‘उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कोरोना मरीजों से मुलाकात की और उनके इलाज को देखा, जिसके परिणामस्वरूप तमिलनाडु में कोरोना का प्रकोप कम हुआ और लोग शांति से रहने लगे।’
उन्होंने बताया कि उदयनिधि स्टालिन समेत मुख्यमंत्री के परिवार ने भी उस समय उनकी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की थी।
दिवंगत नेताओं के. कामराज और वी.एन. जानकी के साथ द्रमुक के बर्ताव को लेकर पलानीस्वामी के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए भारती ने अन्नाद्रमुक प्रमुख पर ‘इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने’ का आरोप लगाया।
उन्होंने बताया कि द्रमुक ने ही अन्ना सलाई पर कामराज की प्रतिमा स्थापित की थी और जब दिल्ली में दक्षिणपंथी चरमपंथियों ने उनके घर में आग लगा दी थी तब उनकी रक्षा की थी।
उन्होंने कहा कि जब कई कांग्रेस नेता स्थान कोई निर्णय नहीं कर पा रहे थे, तब पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने गांधी मंडपम में कामराज के राजकीय अंतिम संस्कार को सुनिश्चित किया था।
भाषा तान्या माधव
माधव

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