बच्चे के पास नकारात्मकता नहीं चाहते : लड़के को यूक्रेनी मां से मिलाने के मामले में अदालत ने कहा
बच्चे के पास नकारात्मकता नहीं चाहते : लड़के को यूक्रेनी मां से मिलाने के मामले में अदालत ने कहा
नयी दिल्ली, 28 नवंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह तीन साल के ‘परेशान’ बच्चे के बारे में कोई नकारात्मकता नहीं चाहता है और उसके माता-पिता महत्वहीन मुद्दों का जिक्र नहीं करें।
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान बच्चे को उसका पिता यूक्रेन से कथित तौर पर अवैध रूप से भारत ले आया था।
अदालत ने कहा कि यूक्रेनी मां को दिल्ली उच्च न्यायालय के ‘क्रेच’ में अपने बच्चे से मिलने की अनुमति देने के पीछे का विचार यह था कि महिला अपने बच्चे के साथ कुछ समय बिता सके। अदालत ने कहा कि वह ‘हर समय’ शिकायत करने के बदले बच्चे के साथ रहेगी।
सुनवाई की शुरुआत में, महिला के वकील ने अदालत से कहा कि उनकी मुलाकात के दौरान, बच्चा अपनी मां को ‘आंटी’ कहकर संबोधित कर रहा था और पिता ने मां को बच्चे को खाना नहीं देने दिया।
इस पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की पीठ ने कहा कि यह मामला बच्चे के भूखा होने का या उसकी ठीक से देखभाल नहीं होने का नहीं है।
पीठ ने कहा, ‘आपको एहसास नहीं है। इसका मकसद यह है कि मां और बहन को बच्चे से मिलवाया जाए। मकसद है कि वे साथ में समय बिताएं। अच्छा हुआ कि अब वह अपनी मां और बहन को पहचान रहा है।’
अदालत ने कहा, ‘‘यह कोई विवादास्पद मुकदमा नहीं है बल्कि एक बंदी प्रत्यक्षीकरण है। हर समय शिकायत करने के बजाय लड़के के साथ रहें। हम बच्चे के आसपास कोई नकारात्मकता नहीं चाहते। वह पहले से ही काफी सदमे में है। कृपया उसे मुक्त रूप से बातचीत करने दें।’
अदालत ने बच्चे की मां और बहन को उच्च न्यायालय के ‘क्रेच’ में उससे मिलने के लिए कहा। अदालत ने निर्देश दिया कि मंगलवार को विभिन्न पक्ष अदालत में उपस्थित रहेंगे।
भाषा अविनाश मनीषा
मनीषा

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