कांग्रेस के शासनकाल में सरकारी नौकरियों के लिए भारी रिश्वत देनी पड़ती थी: हिमंत विश्व शर्मा

कांग्रेस के शासनकाल में सरकारी नौकरियों के लिए भारी रिश्वत देनी पड़ती थी: हिमंत विश्व शर्मा

कांग्रेस के शासनकाल में सरकारी नौकरियों के लिए भारी रिश्वत देनी पड़ती थी: हिमंत विश्व शर्मा
Modified Date: March 28, 2026 / 09:05 pm IST
Published Date: March 28, 2026 9:05 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

सिपाझार (असम), 28 मार्च (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शनिवार को आरोप लगाया कि राज्य में कांग्रेस के शासनकाल में सरकारी नौकरियां देने में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होता था।

शर्मा ने सिपाझार से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार पार्टी विधायक परमानंद राजबोंगशी के समर्थन में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने पिछले पांच वर्षों में 1.65 लाख नौकरियां दीं। उन्होंने अगले कार्यकाल में दो लाख और सरकारी नौकरियां देने का वादा किया।

शर्मा ने कहा,“हमने 1.65 लाख युवाओं को रोजगार दिया। क्या कोई ऐसा कांग्रेसी मुख्यमंत्री बता सकता है जिसने एक लाख नौकरियां दी हों और पैसा भी नहीं देना पड़ा हो? अगर कोई बता सकता है, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। मैं गौरव गोगोई और बिनंदा सैकिया को चुनौती देता हूं कि वे बताएं कि किसके कार्यकाल में असम में इतनी बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिला।”

पूर्व भाजपा विधायक बिनंदा कुमार सैकिया सिपाझार से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं।

भाजपा ने 2021 के विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान असम में हर साल एक लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन बाद में कहा कि यह आंकड़ा पूरे पांच साल के कार्यकाल के लिए था।

शर्मा ने कहा, ‘‘कांग्रेस के शासनकाल में आंगनवाड़ी नौकरियों के लिए भी दो लाख रुपये की रिश्वत देनी पड़ती थी। इस बार मैं दो लाख सरकारी नौकरियां दूंगा।”

मुख्यमंत्री ने कहा,“क्या कांग्रेस कह सकती है कि वह असम में दो लाख युवाओं को नौकरियां देगी? अगर गलती से कुछ को नौकरी मिल भी जाती है, तो उन्हें पांच लाख से एक करोड़ रुपये तक की रिश्वत देनी पड़ेगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस कह रही है कि वह एक नया महान असम बनायेगी। आप किसके साथ मिलकर नया असम बनाएंगे? क्या यह उन बांग्लादेशी मियांओं के साथ होगा जो हाल ही में आए हैं? हमें आपके इस नए महान असम की जरूरत नहीं है।’’

‘मियां’ मूल रूप से असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अपमानजनक शब्द है। गैर-बांग्ला भाषी लोग आम तौर पर उन्हें बांग्लादेशी प्रवासी कहते हैं।

शर्मा ने कहा कि असम सरकार ने स्थानीय हिंदू और मुसलमानों के आशीर्वाद से राज्य में विश्वास और आस्था का एक ‘नया माहौल’ बनाया है।

वरिष्ठ भाजपा नेता शर्मा ने कहा, ‘‘हमने ज़मीन और समुदाय की रक्षा के लिए काम किया। हमने बांग्लादेशी मियाओं के कब्जे से 1.5 लाख बीघा जमीन मुक्त कराई। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि अगर इस बार भाजपा सत्ता में आती है, तो हम बांग्लादेशी मियांओं से पांच लाख बीघा ज़मीन वापस ले लेंगे।’’

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कुछ दिन पहले एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने कथित तौर पर बयान दिया था कि मियां असमिया समुदाय की कमर तोड़ देंगे।

भाजपा नेता ने कहा, ‘‘पिछले पांच वर्षों में हमने बांग्लादेशी मियांओं के हाथ-पैर तोड़े हैं। अगले पांच वर्षों में हम उनकी कमर तोड़ देंगे। हम उन्हें असम में चैन से नहीं रहने देंगे। हम ऐसी स्थिति पैदा करेंगे कि वे चैन से नहीं रह पाएंगे।’’

असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव नौ अप्रैल को होंगे । मतगणना चार मई को होगी।

भाषा राजकुमार संतोष

संतोष


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