जवाद सिद्दीकी को अंतरिम जमानत देने के खिलाफ ईडी की याचिका सुनवायी के लिए निचली अदालत को भेजी
जवाद सिद्दीकी को अंतरिम जमानत देने के खिलाफ ईडी की याचिका सुनवायी के लिए निचली अदालत को भेजी
नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक निचली अदालत को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया, जिसमें अल फलाह विश्वविद्यालय समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी को एक धनशोधन मामले में दी गई दो सप्ताह की अंतरिम जमानत को चुनौती दी गई है।
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने ईडी की याचिका को विशेष न्यायाधीश के पास वापस भेज दिया और कहा कि राहत उनकी पत्नी की कीमोथेरेपी को ध्यान में रखते हुए दी गई थी और उसकी अवधि समाप्त हो चुकी है।
अदालत ने आदेश दिया, ‘‘विशेष तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, खासकर इसलिए कि प्रतिवादी (सिद्दीकी) को उनकी पत्नी की कीमोथेरेपी के मद्देनजर दो सप्ताह की अवधि के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी, जो 12 मार्च, 2026 को होनी थी और चूंकि ईडी ने इसे रद्द करने के लिए याचिका दायर की है, जो लंबित है। न्याय के हित में यह होगा कि वर्तमान याचिका को नये सिरे से सुनवाई के लिए माननीय विशेष न्यायाधीश को वापस भेज दिया जाए।’’
अदालत ने कहा कि निचली अदालत के न्यायाधीश सिद्दीकी की पत्नी के नये मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर मामले का फैसला करेंगे।
न्यायमूर्ति बनर्जी ने सिद्दीकी द्वारा इस महीने की शुरुआत में कथित भूमि धोखाधड़ी से जुड़े एक अन्य धनशोधन मामले में अपनी गिरफ्तारी और हिरासत को चुनौती देने वाली एक अन्य याचिका पर ईडी को नोटिस भी जारी किया।
पिछले सप्ताह, ईडी ने कहा था कि उसने दिल्ली में 45 करोड़ रुपये की जमीन के ‘धोखाधड़ी’ से अधिग्रहण से जुड़े एक नये धनशोधन मामले में सिद्दीकी को फिर से गिरफ्तार किया है। निचली अदालत ने बाद में उन्हें चार अप्रैल तक एजेंसी की हिरासत में भेज दिया।
सात मार्च को, निचली अदालत ने सिद्दीकी को उनके फरीदाबाद स्थित शिक्षण संस्थान के छात्रों द्वारा भुगतान की गई फीस से कथित तौर पर अवैध धन उत्पन्न करने से जुड़े धनशोधन मामले में दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी।
निचली अदालत ने सिद्दीकी को राहत उनकी पत्नी की देखभाल करने के लिए प्रदान की थी, जिनका चौथे चरण के कैंसर का इलाज चल रहा है।
भाषा
अमित नरेश
नरेश

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