निर्वाचन आयोग ने ‘पोइला बैसाखी’ के अवसर पर जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी : बांग्ला पोक्खो

निर्वाचन आयोग ने ‘पोइला बैसाखी’ के अवसर पर जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी : बांग्ला पोक्खो

निर्वाचन आयोग ने ‘पोइला बैसाखी’ के अवसर पर जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी : बांग्ला पोक्खो
Modified Date: April 15, 2026 / 03:43 pm IST
Published Date: April 15, 2026 3:43 pm IST

कोलकाता, 15 अप्रैल (भाषा) बांग्ला भाषी लोगों के एक प्रमुख संगठन ने बुधवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने उसे ‘बांग्ला नव वर्ष’ के अवसर पर जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी। उसने इसे समुदाय के गौरव और संस्कृति पर ‘गंभीर हमला’ करार दिया।

‘बांग्ला पोक्खो’ नामक इस संगठन ने हालांकि निर्वाचन आयोग की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद कोलकाता के दक्षिणी हिस्सों में नववर्ष मनाने के लिए 15 अप्रैल की शाम को जुलूस निकालने की घोषणा की है।

निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि कोलकाता पुलिस के परामर्श के आधार पर अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण, किसी भी अनधिकृत सभा को ‘अवैध’ माना जाता है।

आदर्श आचार संहिता लागू है क्योंकि 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होंगे जबकि मतगणना के लिए चार मई की तारीख तय की गई है।

बांग्ला पोक्खो के महासचिव गर्गा चटर्जी ने कहा, ‘हम पिछले पांच वर्षों से इस ‘पोइला बैसाख’ (बांग्ला नव वर्ष का पहला दिन) रैली का आयोजन कर रहे हैं, जिसमें हजारों लोग हिस्सा लेते हैं। हम बुधवार शाम को दक्षिण कोलकाता में एक शोभा यात्रा निकालेंगे।’’

संगठन ने दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने पहले उत्तरी कोलकाता में एक रैली आयोजित करने की उसकी अर्जी खारिज कर दी थी, साथ ही शहर के दक्षिणी हिस्से में शोभा यात्रा निकालने की भी अनुमति नहीं दी।

चटर्जी ने कहा, ‘‘यह निर्वाचन आयोग द्वारा बंगाल की अस्मिता और संस्कृति पर गंभीर हमले से कम नहीं है। पश्चिम बंगाल में ऐसा कभी नहीं हुआ। बांग्ला नववर्ष शोभायात्रा को इस तरह से नकारने का एकमात्र उदाहरण 1971 में बांग्लादेश के निर्माण से पहले पूर्वी पाकिस्तान में था।’’

उन्होंने कहा कि किसी को भी बांग्लाभाषियों को नववर्ष मनाने से रोकने का अधिकार नहीं है,संगठन के सदस्य, सैकड़ों समर्थकों के साथ, शहर के दक्षिणी हिस्से में रासबिहारी चौराहे से गरियाहाट तक एक रैली निकालेंगे।

चटर्जी ने कहा, ‘‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चितरंजन दास, रवींद्रनाथ टैगोर और काजी नजरूल इस्लाम की भूमि में, अगर बांग्ला नव वर्ष मनाना अपराध है, तो हमें अपराधी करार दिए जाने पर गर्व है।’’

संगठन ने उत्तरी कोलकाता में स्वामी विवेकानन्द और ईश्वर चन्द्र विद्यासागर से जुड़े स्थानों से होते एक शोभा यात्रा निकालने की योजना बनाई थी, लेकिन अनुमति न होने की वजह से ऐसा नहीं हो सका।

भाषा धीरज माधव

माधव


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