आमेर महल में हाथी की सवारी को चरणबद्ध तरीके से बैटरी चलित वाहन से बदला जायेगा

आमेर महल में हाथी की सवारी को चरणबद्ध तरीके से बैटरी चलित वाहन से बदला जायेगा

आमेर महल में हाथी की सवारी को चरणबद्ध तरीके से बैटरी चलित वाहन से बदला जायेगा
Modified Date: November 29, 2022 / 07:53 pm IST
Published Date: January 5, 2021 11:37 am IST

जयपुर, पांच जनवरी (भाषा) केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में ऐतिहासिक आमेर महल में हाथी की सवारी को चरण बद्ध तरीके से बैटरी चलित वाहनों के साथ बदलने की सिफारिश की है।

समित की ओर से 28 दिसम्बर को जारी रिपोर्ट में हाथियों की बढ़ती उम्र, और पर्यटकों की घटती प्रवृत्ति का हवाला देते हुए बदलावों की सिफारिश की है।

रिपोर्ट में बताया गया, ‘‘ऐतिहासिक आमेर महल से चरण बद्ध तरीके से हाथी की सवारी को हटाया जा सकता है और उसकी जगह परिवहन के वैकल्पिक साधनों जैसे बिजली या बैटरी चलित वाहनों में बदला जा सकता है।’’

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘हाथियों की सवारी करने वाले पर्यटकों की घटती प्रवृत्ति और हाथियों की बढ़ती उम्र बदलाव के सूचक हैं। ऐसी स्थिति में हाथी मालिकों के उचित पुर्नवास की व्यवस्था की जानी चाहिए। हाथी सवारी के लिये नये हाथियों को जोड़ने को पूरी तरह से बंद करना चाहिए।’’

पशु अधिकार के लिये काम करने वाली संस्था ‘पेटा इंडिया’ (पीपुल्स फॉर दी एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल इन इंडिया) ने एक बयान में बताया कि समिति का गठन हाथियों पर क्रूरता के बारे में उच्चतम न्यायालय द्वारा चिंताओं के आधार पर दिये गये आदेश के बाद किया गया था।

पेटा इंडिया व याचिकाकर्ता और वन्य जीव बचाव एवं पुनर्वास केन्द्र की ओर से जयपुर के आमेर महल में हाथी सवारी और हाथी गांव में हाथियों के अवैध उपयोग का मामला उठाया गया था।

समित की रिपोर्ट में कहा गया कि 98 बंदी हाथियों के निरीक्षण में पाया गया कि 22 हाथी आंखों संबंधी समस्या से पीड़ित थे और 42 हाथियों को पैरो की समस्या थी जिसमें ऊँचें नाखूनों और सपाट फूटपेड्स से कंक्रीट वाली सड़को पर चलने में समस्या हो रही थी। तीन हाथी तपेदिक से संक्रमित पाये गये थे। जिसके बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट में हाथियों और महावतों की साल में दो बार तपेदिक संबंधी जांच की अनुशंसा की थी।

पेटा इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मनिलाल वालिवते ने बताया, ‘‘इन ऐतिहासिक वैज्ञानिक और मानवीय सिफारिशों का मलतब है कि उम्रदराज, बीमार हाथियों को पर्यटकों का खिलौना मानने के चंद दिन शेष बचे है।”

उन्होंने कहा कि हाथियों पर क्रूरता को समाप्त करने के लिये दीर्घकालिक समाधान वाली यह साक्ष्य-आधारित रिपोर्ट अब इन जानवरों को सेवानिवृत्ति के बाद अभ्यारण्यों के लिये बुला रही है।

भाषा कुंज

प्रशांत

प्रशांत


लेखक के बारे में