बहुराष्ट्रीय कंपनी में 30 लाख रुपये वार्षिक वेतन की नौकरी छोड़ इंजीनियर बना साइबर ठग
बहुराष्ट्रीय कंपनी में 30 लाख रुपये वार्षिक वेतन की नौकरी छोड़ इंजीनियर बना साइबर ठग
नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) बहुराष्ट्रीय कंपनी में 30 लाख रुपये सालाना वेतन पाने वाला 31 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर कथित रूप से अपना कॉर्पोरेट करियर छोड़ एक फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग गिरोह चलाने लगा, जिसने देश भर के सैकड़ों निवेशकों से करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी की है।
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी की पहचान रवि राठौड़ के रूप में हुई है, जिसे एक अंतरराज्यीय अभियान के बाद उसके दो सहयोगियों के साथ बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, यह गिरोह एक फर्जी मोबाइल ऐप और धोखाधड़ी वाली वेबसाइट का इस्तेमाल कर पीड़ितों को ट्रेडिंग के नाम पर निवेश करने का लालच देता था और भारी मुनाफे की गारंटी देता था।
मध्य दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) रोहित राजवीर सिंह ने एक बयान में कहा, ‘धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब पहाड़गंज के एक निवासी ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। उसने आरोप लगाया कि एक फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग मंच के जरिए उसके साथ ठगी की गई है।’
अधिकारी ने बताया कि शिकायतकर्ता को अज्ञात लोगों के फोन और संदेश प्राप्त हुए थे, जिन्होंने उसे मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए राजी किया।
अधिकारी ने कहा कि उनके दावों पर विश्वास करते हुए शिकायतकर्ता ने विभिन्न ऑनलाइन भुगतान प्रणालियों के माध्यम से कई किस्तों में 10,000 रुपये स्थानांतरित कर दिए।
शुरुआत में, पीड़ित का विश्वास जीतने और उसे अधिक पैसा निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ऐप पर रोजाना फर्जी मुनाफा दिखाया जाता था।
डीसीपी ने कहा, ‘हालांकि, जब भी उसने राशि निकालने का प्रयास किया, तो उससे कथित तौर पर कर, खाता सक्रिय करने और प्रक्रिया शुल्क जैसे विभिन्न बहानों के नाम पर अतिरिक्त धनराशि जमा करने को कहा गया।’
पुलिस ने बताया कि साइबर धोखाधड़ी के संबंध में सरकारी परामर्श देखने के बाद शिकायतकर्ता को संदेह हुआ और उसने तुरंत मामले की सूचना दी, जिसके बाद एक मई को प्राथमिकी दर्ज की गई।
जांच के दौरान, पुलिस ने व्यापक तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल निगरानी, वित्तीय लेनदेन की जांच, आईपी ट्रैकिंग और सर्वर लॉग विश्लेषण किया।
जांच में खुलासा हुआ कि धोखाधड़ी वाले ऐप का संचालन कर्नाटक के बेंगलुरु से किया जा रहा था, जबकि कॉल करने और पैसों के लेनदेन के तार मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के सनावद से जुड़े हुए मिले।
पुलिस ने बताया कि कर्नाटक और मध्य प्रदेश में एक साथ आरोपियों का पता लगाने और उन्हें पकड़ने के लिए दो टीमों का गठन किया गया था।
उन्होंने कहा, ‘एक टीम ने तकनीकी निगरानी और ‘डिजिटल इंटेलिजेंस इनपुट’ के माध्यम से बेंगलुरु में रवि राठौड़ का पता लगाया। उसे तीन मई को पकड़ लिया गया और पुलिस ने उसके कब्जे से दो लैपटॉप, एक मोबाइल फोन और अपराध की कमाई से खरीदी गई एक एसयूवी बरामद की।’
सिंह के मुताबिक, दूसरी टीम ने सनावद में छापेमारी कर पांच मई को सह-आरोपियों सुदामा और विकास राठौड़ को पकड़ा। कॉल सेंटर के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे परिसर की तलाशी के दौरान पुलिस ने 17 मोबाइल फोन, पांच कंप्यूटर, 13 सिम कार्ड, बैंक खातों के विवरण, एटीएम कार्ड और हजारों संभावित पीड़ितों के विवरण वाला डिजिटल डेटा बरामद किया।
पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह स्थापित किया था, जो विशेष रूप से ऑनलाइन शेयर बाजार निवेश में रुचि रखने वाले लोगों को निशाना बनाता था।
पुलिस ने बताया गया कि पुरुष पीड़ितों को प्रभावित करने और उन्हें बड़ी राशि निवेश करने के लिए जाल में फंसाने के लिए कॉल सेंटर में जानबूझकर महिला कर्मियों कॉल करने के काम पर रखा गया था।
अधिकारी ने बताया, ‘रवि राठौड़ कंप्यूटर साइंस इंजीनियर है, जिसने पहले कई अंतरराष्ट्रीय सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनियों के साथ काम किया था और हाल ही में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत था।’
उन्होंने कहा कि पूछताछ के दौरान, उसने कथित तौर पर खुलासा किया कि उसके पास मोबाइल ऐप बनाने और उसके संचालन में विशेषज्ञता है।
पुलिस ने बताया कि राठौड़ अपने एक रिश्तेदार के माध्यम से सुदामा के संपर्क में आया और उन्होंने साथ मिलकर वास्तविक निवेश ऐप जैसा दिखने वाला एक फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग मंच बनाने की साजिश रची।
आरोप है कि राठौड़ ने फर्जी ऐप और धोखाधड़ी वाली वेबसाइट बनाई और उसे चलाया। उसने नकली पहचान का इस्तेमाल करके इसे अलग-अलग मंचों पर अपलोड किया और लोगों को असली लगने के लिए इसके रिव्यू और तकनीकी प्रणाली में भी हेरफेर किया।
पुलिस ने बताया कि सुदामा ने इसके लिए वित्त पोषण किया और परिचालन प्रबंधन संभाला, जबकि विकास राठौड़ पीड़ितों से संवाद, कॉल और निवेशकों को फंसाने का काम संभालता था।
पुलिस ने बताया कि ‘एडमिन पैनल’ और ‘बैकएंड डेटा’ के तकनीकी परीक्षण से पता चला कि फर्जी मंच के माध्यम से लगभग 636 पीड़ितों के खाते बनाए गए और संचालित किए गए थे। जांचकर्ताओं को लगभग 14,232 लेनदेन भी मिले, जिनमें ठगी गई कुल राशि लगभग 99.77 करोड़ रुपये थी।
पुलिस ने कहा कि आरोपियों के विभिन्न राज्यों में इसी तरह के कई साइबर धोखाधड़ी मामलों में शामिल होने का संदेह है। सभी पीड़ितों की पहचान करने, पैसे के लेनदेन का पता लगाने और ‘म्यूल’ (कमीशन पर मिलने वाले) बैंक खातों का पर्दाफाश करने के लिए जांच जारी है।
भाषा नोमान नोमान माधव
माधव

Facebook


