भारत के 75 छात्रों को ‘इरास्मस प्लस’ छात्रवृत्ति; ‘ईयू-भारत स्टूडेंट एंबेसडर्स नेटवर्क’ की शुरुआत

भारत के 75 छात्रों को ‘इरास्मस प्लस’ छात्रवृत्ति; ‘ईयू-भारत स्टूडेंट एंबेसडर्स नेटवर्क’ की शुरुआत

भारत के 75 छात्रों को ‘इरास्मस प्लस’ छात्रवृत्ति; ‘ईयू-भारत स्टूडेंट एंबेसडर्स नेटवर्क’ की शुरुआत
Modified Date: June 22, 2026 / 09:37 pm IST
Published Date: June 22, 2026 9:37 pm IST

नयी दिल्ली, 22 जून (भाषा) यूरोपीय संघ ने ‘ईयू-भारत स्टूडेंट एंबेसडर्स नेटवर्क’ की शुरुआत की है जिसके तहत भारत के 20 विश्वविद्यालयों से 40 ‘‘छात्र दूतों’’ को एक मंच पर लाया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य यूरोप में उपलब्ध शैक्षणिक और शोध अवसरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना तथा देशभर के युवाओं के बीच यूरोपीय संघ (ईयू) और भारत की साझेदारी को लेकर गहरी समझ और सहभागिता को प्रोत्साहित करना है।

भारत में यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने एक बयान में कहा कि युवा, नवाचार और ज्ञान-साझाकरण पर केंद्रित ईयू-भारत रणनीतिक एजेंडा के अनुरूप यह देशव्यापी नेटवर्क छात्रों के बीच आपसी सहयोग और संवाद का एक मंच तैयार करेगा।

विभिन्न पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं को सशक्त बनाकर यह कार्यक्रम शैक्षणिक और सांस्कृतिक स्तर पर जमीनी संबंधों को मजबूत बनाए रखने में मदद करेगा तथा विचारों के निरंतर और सार्थक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा।

बयान में यह भी कहा गया कि यूरोपीय संघ ने 2026-2028 शैक्षणिक सत्र के लिए 75 भारतीय छात्रों को दो वर्षीय ‘इरास्मस मुंडस जॉइंट मास्टर डिग्री (ईएमजेएमडी) छात्रवृत्ति प्रदान की है। इसके साथ ही भारत ने 2004 से अब तक इन छात्रवृत्ति के सबसे बड़े लाभार्थी देश के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है तथा इस वर्ष के चयन में वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन देशों में स्थान हासिल किया है।

वर्तमान में लगभग एक लाख भारतीय छात्र यूरोप के विभिन्न देशों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। यूरोप, विश्वस्तरीय शिक्षा और शोध के अवसरों की तलाश करने वाले भारतीय छात्रों के लिए आज भी एक पसंदीदा गंतव्य बना हुआ है।

‘इरास्मस प्लस’ कार्यक्रम की शुरुआत 1987 में हुई थी। इसका पूरा नाम ‘यूरोपियन रीजन एक्शन स्कीम फॉर द मोबिलिटी ऑफ यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स’ है। यह यूरोपीय संघ की प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय छात्र आदान-प्रदान, शैक्षणिक सहयोग और वैश्विक स्तर पर शिक्षा के अवसरों को बढ़ावा देना है।

बयान में कहा गया कि 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 20 विश्वविद्यालयों से चुने गए ये ‘छात्र दूत’ भारत के शैक्षणिक परिदृश्य की विविधता और समावेशी स्वरूप का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भाषा आशीष माधव

माधव


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