अरावली पर विशेषज्ञ समिति को विशेषज्ञों, अन्य हितधारकों से परामर्श करना चाहिए: न्यायालय

अरावली पर विशेषज्ञ समिति को विशेषज्ञों, अन्य हितधारकों से परामर्श करना चाहिए: न्यायालय

अरावली पर विशेषज्ञ समिति को विशेषज्ञों, अन्य हितधारकों से परामर्श करना चाहिए: न्यायालय
Modified Date: May 25, 2026 / 05:25 pm IST
Published Date: May 25, 2026 5:25 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला को परिभाषित करने के लिए गठित की जाने वाली विशेषज्ञ समिति को संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से परामर्श करना चाहिए ताकि आम जनता की राय सुनी जा सके।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह भी कहा कि समिति में अधिक सदस्य नहीं हो सकते क्योंकि इससे प्रबंधन मुश्किल हो जाता है।

पीठ ने कहा, ‘‘हम 30 लोगों की समिति नहीं बना सकते क्योंकि इससे प्रबंधन मुश्किल हो जायेगा। समिति को विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए और इसमें पांच-सात सदस्य होने चाहिए। हम इसे आदेश में दर्ज कर लेंगे।’’

सुनवाई शुरू होते ही केंद्र की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति और न्याय मित्र ने समिति में शामिल किए जाने वाले कुछ सामान्य नामों को सुझाया है, जिन्हें अंतिम रूप दिया जा सकता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता के परमेश्वर, जो कि न्याय मित्र हैं, ने कहा कि विशेषज्ञ समिति को हितधारकों के पक्ष को भी ध्यान में रखना चाहिए ताकि जनता की बात व्यापक रूप से सुनी जा सके।

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने पर्यावरण मंत्रालय और अन्य हितधारकों से उस समिति के लिए विशेषज्ञों के नाम सुझाने को कहा था, जो दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला, अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं को परिभाषित करेगी।

उच्चतम न्यायालय ने अपने 20 नवंबर के फैसले में दिए गए उन निर्देशों को पिछले साल 29 दिसंबर को स्थगित रखने का आदेश दिया था जिसमें अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला की एक समान परिभाषा को स्वीकार किया गया था।

इसने कहा था कि कुछ ‘‘महत्वपूर्ण अस्पष्टताओं’’ को दूर करने की आवश्यकता है, जिनमें यह भी शामिल है कि क्या 100 मीटर की ऊंचाई और पहाड़ियों के बीच 500 मीटर का अंतर पर्यावरण संरक्षण के दायरे के एक महत्वपूर्ण हिस्से को कम कर देगा।

उच्चतम न्यायालय ने अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक समान परिभाषा को 20 नवंबर, 2025 को स्वीकार कर लिया था तथा विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान एवं गुजरात में फैले इसके क्षेत्रों में नए खनन पट्टे देने पर रोक लगा दी थी।

इसने विश्व की सबसे पुरानी पर्वत प्रणाली की सुरक्षा के लिए अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था।

समिति ने अनुशंसा की थी कि अरावली पहाड़ी की परिभाषा अरावली जिलों में स्थित ऐसी किसी भी भू-आकृति के रूप में की जाए, जिसकी ऊंचाई स्थानीय भू-स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक हो; और और ‘‘अरावली पर्वतमाला’’ एक-दूसरे से 500 मीटर के भीतर दो या अधिक ऐसी पहाड़ियों का संग्रह होगी।

भाषा

देवेंद्र मनीषा

मनीषा


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