अल्पसंख्यकों और परमार्थ संगठनों को निशाना बनाने वाला है एफसीआरए संशोधन विधेयक: वेणुगोपाल
अल्पसंख्यकों और परमार्थ संगठनों को निशाना बनाने वाला है एफसीआरए संशोधन विधेयक: वेणुगोपाल
कोट्टयम (केरल), 30 मार्च (भाषा) कांग्रेस महासचिव (संगठन) के. सी. वेणुगोपाल ने सोमवार को आरोप लगाया कि संसद में पेश किया गया एफसीआरए संशोधन विधेयक अल्पसंख्यक समुदायों और परमार्थ संगठनों को निशाना बनाता है।
उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन (एफसीआरए) विधेयक ‘अल्पसंख्यकों पर ‘डेमोक्लीज की तलवार’ (हर समय मंडरा रहा बड़ा खतरा) की तरह लटका हुआ है’ और दावा किया कि इसका उद्देश्य ईसाई समुदायों को अपने नियंत्रण में लाना है।
यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था, जिसमें सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया था कि विदेशी धन के माध्यम से जबरन धर्मांतरण में लिप्त व्यक्तियों को बख्शा नहीं जाएगा।
वेणुगोपाल ने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों में दिए गए प्रावधान परमार्थ संगठनों के कामकाज को सीमित करेंगे और केंद्र की दखलअंदाजी को बढ़ावा देंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक पर्याप्त सूचना दिए बिना पेश किया गया, जबकि चुनाव वाले राज्यों के सांसद चुनाव प्रचार में व्यस्त थे।
उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी द्वारा प्रावधानों में विसंगतियों की ओर इशारा करने और उन पर आपत्ति जताने के बाद ही विवरण सामने आए। आपत्तियों के बावजूद, विधेयक पेश किया गया।’
उन्होंने दावा किया कि इन संशोधनों से केंद्र सरकार को अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित संगठनों सहित अन्य संगठनों को अपने नियंत्रण में लेने का अधिकार मिल जाएगा, जिसके लिए वह एक नामित प्राधिकारी या प्रशासक की नियुक्ति कर सकती है।
वेणुगोपाल ने कहा, ‘जब प्रधानमंत्री केरल का दौरा करें और जनसभाओं को संबोधित करें, तो उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह विधेयक किसे निशाना बना रहा है।’
नौ अप्रैल को होने वाले केरल चुनावों के लिए प्रचार अभियान तेज होने के साथ ही वेणुगोपाल ने अल्पसंख्यकों पर हमलों के एक पैटर्न का आरोप लगाया। उन्होंने इसमें छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में नन व पुजारियों से जुड़ी घटनाओं का हवाला दिया और कहा कि इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही हैं।
वेणुगोपाल ने रविवार को पलक्कड़ में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए शबरिमला मंदिर में कथित तौर पर सोने के गायब होने के मामले पर प्रधानमंत्री के चुप रहने की भी आलोचना की।
उन्होंने सवाल उठाया कि श्रद्धालुओं का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाली भाजपा इस मामले को अब क्यों नहीं उठा रही है।
भाषा
शुभम दिलीप
दिलीप

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