कानपुर देहात में 400 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में पूर्व एडीएम सहित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी

कानपुर देहात में 400 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में पूर्व एडीएम सहित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी

कानपुर देहात में 400 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में पूर्व एडीएम सहित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी
Modified Date: May 13, 2026 / 01:13 am IST
Published Date: May 13, 2026 1:13 am IST

कानपुर देहात/लखनऊ (उप्र) 12 मई (भाषा) कानपुर देहात जिले के भोगनीपुर क्षेत्र में करीब 400 करोड़ रुपये के कथित जमीन घोटाले में तापीय विद्युत संयंत्र लगाने के नाम पर हुई वित्तीय अनियमितताओं को लेकर पूर्व एडीएम और संबंधित कंपनियों व बैंकों के अधिकारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।

बयान में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने की नीति को जारी रखते हुए बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूर्व अपर जिलाधिकारी (एडीएम) और संबंधित कंपनियों व बैंकों के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।

बयान के अनुसार यह मामला साल 2011 से शुरू हुआ था। शासन ने चपरघटा और आसपास के गांवों (कृपालपुर, भुण्डा, रसूलपुर और भरतौली) की ग्राम समाज और निजी काश्तकारों की जमीन तापीय संयंत्र के लिए आवंटित की थी।

जिलाधिकारी कपिल सिंह के संज्ञान में जब यह आया कि बिना सरकार की अनुमति के सरकारी जमीन को बंधक रखा गया है, तो उन्होंने जांच के आदेश दिए। जांच में पता चला कि कंपनियों ने अधिकारियों के साथ मिलकर राजस्व क्षति पहुंचाई है। इसके बाद भोगनीपुर तहसीलदार प्रिया सिंह की शिकायत पर थाना मूसानगर में प्राथमिकी दर्ज की गई।

कानपुर देहात के भोगनीपुर में वर्ष 2011 में हिमावत पावर और लैन्को अनपरा पावर कंपनियों को तापीय विद्युत संयंत्र लगाने के लिए सात गांवों की लगभग 2332 एकड़ भूमि दी गई थी। समझौते की शर्तों के अनुसार, इन कंपनियों को तीन साल के भीतर निर्माण कार्य शुरू कर बिजली उत्पादन करना था। लेकिन 15 साल बीत जाने के बाद भी कंपनियों ने वहां कोई काम नहीं किया और वह सरकारी तथा अधिग्रहीत भूमि आज भी खाली पड़ी है।

इन कंपनियों ने धोखाधड़ी करते हुए भूमि समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया। प्रशासन को यह भी शिकायत मिली कि बिजली कंपनियों ने इस सरकारी भूमि को गिरवी रखकर बैंकों से 1500 करोड़ रुपये का कर्ज ले लिया। कंपनियों ने न तो बिजली घर बनाया और न ही बैंकों का कर्ज चुकाया।

जांच में सामने आया है कि इस पूरे मामले में कंपनियों और बैंकों के साथ-साथ तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति) ओ.के. सिंह की भी मिलीभगत थी।

जब बैंकों ने इस कीमती भूमि को अवैध रूप से नीलाम करने की कोशिश की, तो वर्तमान जिलाधिकारी कपिल सिंह ने इसका संज्ञान लिया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई की। नीलामी पर रोक लगाकर इसे सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराया गया।

भाषा सं आनन्द सुरभि

सुरभि


लेखक के बारे में