जाली हस्ताक्षर मामला: अभिषेक बनर्जी और कुणाल घोष पूछताछ के लिए सीआईडी मुख्यालय पहुंचे
जाली हस्ताक्षर मामला: अभिषेक बनर्जी और कुणाल घोष पूछताछ के लिए सीआईडी मुख्यालय पहुंचे
(तस्वीरों के साथ)
कोलकाता, 14 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति के लिए विधायकों के हस्ताक्षरों की कथित जालसाजी के मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी रविवार को दूसरे दौर की पूछताछ के लिए यहां अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) मुख्यालय पहुंचे।
बाद में दोपहर के समय इसी मामले में तृणमूल नेता और विधायक कुणाल घोष भी यहां भवानी भवन में पश्चिम बंगाल पुलिस मुख्यालय पहुंचे। उन्हें भी सीआईडी ने इसी मामले में तलब किया था।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले सप्ताह पूछताछ के दौरान डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी द्वारा दिए गए जवाबों से जांच अधिकारी पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे, इसलिए उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया।
एक अधिकारी ने बताया कि पूछताछ के दौरान दोनों नेताओं को आमने-सामने बैठाकर भी सवाल-जवाब किए जाने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि बनर्जी से उस बैठक के बारे में पूछा गया जहां ‘प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किये गये थे।’
सीआईडी अधिकारी ने बताया, ‘‘बनर्जी से मामले के सिलसिले में कुछ खास दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है।’’
उन्होंने बताया, “बनर्जी से इस मामले से जुड़े कुछ खास दस्तावेज देने को कहा गया है।”
अधिकारी ने यह भी बताया कि तृणमूल के दोनों नेताओं के जवाबों को परखा जाएगा।
तृणमूल कांग्रेस के विधायकों ने छह मई को बनर्जी के कालीघाट आवास पर बैठक की थी और नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए शोभनदेव चट्टोपाध्याय के नाम का प्रस्ताव रखा था।
खबरों के अनुसार, बैठक में मौजूद विधायकों ने हाथ उठाकर अपना समर्थन जताया।
हालांकि, औपचारिक प्रस्ताव तुरंत विधानसभा को नहीं दिया गया। विधानसभा सचिवालय ने 13 और 14 मई को तृणमूल विधायकों के शपथ लेने के बाद पार्टी से इस पद के लिए अपने उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव देने को कहा था।
इसके बाद 19 मई को फिर से बैठक हुई, जिसके बाद चट्टोपाध्याय के समर्थन में 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक दस्तावेज सौंपा गया।
बाद में तृणमूल कांग्रेस विधायकों द्वारा जमा कराए गए अलग-अलग दस्तावेजों में हस्ताक्षरों में कथित अंतर पाए जाने के बाद सवाल उठे।
इस मामले में आखिरकार प्राथमिकी दर्ज हुई और सीआईडी जांच शुरू हुई।
सीआईडी इस मामले में पहले ही कई विधायकों से पूछताछ कर चुकी है।
भाषा जितेंद्र राजकुमार
राजकुमार

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