जाली हस्ताक्षर मामला: सीआईडी अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी और कुणाल घोष से पूछताछ की

जाली हस्ताक्षर मामला: सीआईडी अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी और कुणाल घोष से पूछताछ की

जाली हस्ताक्षर मामला: सीआईडी अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी और कुणाल घोष से पूछताछ की
Modified Date: June 14, 2026 / 09:41 pm IST
Published Date: June 14, 2026 9:41 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

कोलकाता, 14 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति के लिए विधायकों के हस्ताक्षरों की कथित जालसाजी के मामले में अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) ने रविवार को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और विधायक कुणाल घोष से घंटों पूछताछ की।

अभिषेक बनर्जी आज दूसरे दौर की पूछताछ के लिए यहां सीआईडी मुख्यालय पहुंचे थे।

सीआईडी कार्यालय से बाहर निकलने के बाद बेलघाटा के विधायक घोष ने दावा किया कि पूछताछ के दौरान उन्हें और बनर्जी को आमने-सामने बैठाया गया था।

सीआईडी कार्यालय में लगभग चार घंटे तक चली पूछताछ के बाद घोष ने पत्रकारों से कहा, ‘‘मैंने उनके सभी सवालों के जवाब दिए हैं। मैंने उनकी जांच में सहयोग किया है।’’

हालांकि, बनर्जी से पूछताछ साढ़े आठ घंटे से ज़्यादा समय तक चली।

एक भरोसेमंद सूत्र के अनुसार, सीआईडी अधिकारियों ने पहले बनर्जी और घोष, दोनों से अलग-अलग पूछताछ की और फिर उन्हें आमने-सामने बैठाया।

एक अधिकारी ने कहा, ‘‘पूछताछ के सत्र का रिकॉर्ड रखा गया है। जिस दिन (19 मई को) बैठक हुई थी, उस दिन से जुड़े सवाल पूछे गए थे। बैठक में कौन-कौन मौजूद था और प्रस्ताव पर किसने हस्ताक्षर किए, इस बारे में भी सवाल पूछे गए।’’

अधिकारियों के अनुसार, पिछले सप्ताह पूछताछ के दौरान डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी द्वारा दिए गए जवाबों से जांच अधिकारी पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे, इसलिए उन्हें आज दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया।

उन्होंने कहा कि बनर्जी से उस बैठक के बारे में पूछा गया जहां ‘प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किये गये थे।’

तृणमूल कांग्रेस के विधायकों ने छह मई को बनर्जी के कालीघाट आवास पर बैठक की थी और नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए शोभनदेव चट्टोपाध्याय के नाम का प्रस्ताव रखा था।

खबरों के अनुसार, बैठक में मौजूद विधायकों ने हाथ उठाकर अपना समर्थन जताया।

हालांकि, औपचारिक प्रस्ताव तुरंत विधानसभा को नहीं दिया गया। विधानसभा सचिवालय ने 13 और 14 मई को तृणमूल विधायकों के शपथ लेने के बाद पार्टी से इस पद के लिए अपने उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव देने को कहा था।

इसके बाद 19 मई को फिर से बैठक हुई, जिसके बाद चट्टोपाध्याय के समर्थन में 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक दस्तावेज सौंपा गया।

बाद में तृणमूल कांग्रेस विधायकों द्वारा जमा कराए गए अलग-अलग दस्तावेजों में हस्ताक्षरों में कथित अंतर पाए जाने के बाद सवाल उठे।

इस मामले में आखिरकार प्राथमिकी दर्ज हुई और सीआईडी जांच शुरू हुई।

सीआईडी इस मामले में पहले ही कई विधायकों से पूछताछ कर चुकी है।

भाषा शफीक दिलीप

दिलीप


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