खेतों से वैश्विक बाजार तक: मणिपुर की झांकी में जीआई-टैग कृषि उत्पादों की झलक
खेतों से वैश्विक बाजार तक: मणिपुर की झांकी में जीआई-टैग कृषि उत्पादों की झलक
नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) कर्तव्य पथ पर सोमवार को मणिपुर की झांकी ने राज्य की पारंपरिक कृषि भूमि से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक की यात्रा को दर्शाया, जहां अब स्वदेशी और उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पादों की बिक्री हो रही है।
झांकी में भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त उत्पादों की भूमिका को प्रमुखता से दिखाया गया, जो राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने के साथ-साथ हजारों किसानों की आजीविका में सुधार का माध्यम बने हैं।
झांकी के अग्रभाग में उखरुल पहाड़ियों की प्रसिद्ध सिराराखोंग हाथेई मिर्च को केंद्र में रखा गया। पारंपरिक परिधान में एक महिला को इस तीखी मिर्च की खेती करते हुए दिखाया गया, जो जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण और कृषि में महिलाओं की भागीदारी का प्रतीक था।
झांकी में प्रमुखता से प्रदर्शित जीआई टैग प्रतीक प्रामाणिकता, संरक्षण और वैश्विक पहचान का संकेत देता नजर आया। इसके मध्य भाग में मणिपुर के सुगंधित और पौष्टिक काले चावल ‘चाक-हाओ’ को दर्शाया गया। ‘एपीडा’ की पहल के जरिए जापान, कोरिया, चीन और यूरोपीय संघ जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग बढ़ रही है, जो किसानों की आत्मनिर्भरता और मूल्य संवर्धित निर्यात की दिशा में महत्वपूर्ण कदम को दर्शाता है।
झांकी के पिछले हिस्से में पश्चिमी पहाड़ियों की पारंपरिक तारेन्ग-काई शैली के घर की पृष्ठभूमि में प्रसिद्ध तामेंगलोंग संतरे को प्रदर्शित किया गया।
“ऑर्गेनिक इंडिया” का लोगो राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के तहत 400 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में जैविक प्रमाणन को दर्शाता है, जो मणिपुर को पूर्णतः जैविक राज्य बनाने की आकांक्षा को रेखांकित करता है।
झांकी के साइड पैनल पर राज्य पक्षी ‘नोंग-इन’ (बार-टेल्ड या मिसेज ह्यूम्स फीजेंट) की आकर्षक आकृतियां बनाई गई थीं, जो प्रकृति, परंपरा और आर्थिक प्रगति के बीच सामंजस्य की कहानी को पूर्ण करती हैं।
भाषा मनीषा अविनाश
अविनाश


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