अर्थव्यवस्था की खराब तस्वीर पेश करते हैं जीडीपी आंकड़े : कांग्रेस

अर्थव्यवस्था की खराब तस्वीर पेश करते हैं जीडीपी आंकड़े : कांग्रेस

अर्थव्यवस्था की खराब तस्वीर पेश करते हैं जीडीपी आंकड़े : कांग्रेस
Modified Date: August 31, 2026 / 10:05 pm IST
Published Date: August 31, 2026 10:05 pm IST

नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) कांग्रेस ने अप्रैल-जून तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों को लेकर सोमवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि जिस रूप में भी ये आंकड़े पेश किए जा रहे हैं, वे अर्थव्यवस्था की ‘‘बेहद खराब तस्वीर’’ पेश करते हैं।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा समय से पहले जश्न मनाने का मामला है।

रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़े अर्थव्यवस्था में घरेलू और विदेशी, दोनों तरह के निजी निवेश को लेकर बेहद कमजोर धारणा को नहीं दिखाते हैं।

उन्होंने कहा, ‘उपभोक्ता विश्वास बेहद सुस्त है, जो कोविड के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है और नवंबर 2025 से लगातार नीचे जा रहा है। आवश्यक वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और शिक्षित बेरोजगारी चिंताजनक स्तर पर है।’

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि चीन के साथ लगातार व्यापार घाटा भारी नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री द्वारा ‘‘जानबूझकर प्रोत्साहित’’ किए गए कुछ बड़े कारोबारी समूहों का प्रमुख क्षेत्रों पर कब्जा भी नुकसानदेह असर डाल रहा है।

रमेश ने कहा कि भारत के पांच सबसे अमीर परिवारों की संपत्ति में 400 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि वेतनभोगी कामगारों की वास्तविक मजदूरी घटी है। उन्होंने कहा कि घरेलू बचत दर में गिरावट आई है और कर्ज रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

देश की अर्थव्यवस्था अप्रैल-जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा था कि ‘‘निराशावादियों की हार हुई और भारत एक बार फिर फला-फूला।’’

इससे पहले, कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी जीडीपी वृद्धि को लेकर सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि एक तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि को ‘‘आर्थिक वसंत’’ नहीं कहा जा सकता। इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि यदि अर्थव्यवस्था वास्तव में फल-फूल रही है तो इसका लाभ रोजगार और समृद्धि के रूप में लोगों तक क्यों नहीं पहुंच रहा है।

भाषा हक माधव अविनाश

अविनाश


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