गहलोत ने प्रधानमंत्री मोदी से पश्चिम एशिया संकट को लेकर की गई अपील पर स्पष्टीकरण मांगा

गहलोत ने प्रधानमंत्री मोदी से पश्चिम एशिया संकट को लेकर की गई अपील पर स्पष्टीकरण मांगा

गहलोत ने प्रधानमंत्री मोदी से पश्चिम एशिया संकट को लेकर की गई अपील पर स्पष्टीकरण मांगा
Modified Date: May 11, 2026 / 09:40 pm IST
Published Date: May 11, 2026 9:40 pm IST

जयपुर, 11 मई (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पश्चिम एशिया संकट के संदर्भ में लोगों से की गई खर्चों में कटौती संबंधी अपील के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।

जयपुर हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से बातचीत में गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री की लोगों से सोना न खरीदने और विदेश यात्रा से बचने की अपील ने बड़े पैमाने पर अटकलों और आलोचनाओं को जन्म दिया है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी का हवाला देते हुए गहलोत ने कहा कि विपक्ष के नेता की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार चुनावों के बाद संभवत: कीमतों या शुल्कों में वृद्धि की तैयारी कर रही है।

गहलोत ने कहा, “लोग स्थिति पर स्पष्टता चाहते हैं।”

केरल में सरकार गठन के मुद्दे पर गहलोत ने कहा कि राजनीतिक दलों की अपनी आंतरिक प्रक्रियाएं होती हैं और बाहरी लोगों को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में संपन्न हालिया विधानसभा चुनावों “इतिहास पर धब्बे” के रूप में देखा जाएगा। उन्होंने कहा, “वहां धनबल का अत्यधिक इस्तेमाल और सुरक्षा बलों की अभूतपूर्व तैनाती हुई।”

गहलोत ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत मतदाता सत्यापन पर भी चिंता जताई।

उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 27 लाख मतदाताओं को बाद में पात्र माना गया, फिर भी वे मतदान नहीं कर सके।

गहलोत ने कहा, “अगर एक भी मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित किया जाता है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर ऐसी शिकायतें सामने आई थीं, तो चुनाव स्थगित कर दिए जाने चाहिए थे।”

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि हाल में संपन्न चुनावों के दौरान लोकतांत्रिक प्रक्रिया और समान अवसर के सिद्धांत को कमजोर किया गया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर धर्म के नाम पर विभाजनकारी राजनीति करने का भी आरोप लगाया।

गहलोत ने कहा, “लोकतंत्र की रक्षा करना आम नागरिकों के अधिकारों और गरिमा की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।”

भाषा

बाकोलिया पारुल

पारुल


लेखक के बारे में