गोवा सरकार की ‘तारे जमीन पर’ तारामंडल पहल का उद्देश्य छात्रों में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना

गोवा सरकार की ‘तारे जमीन पर’ तारामंडल पहल का उद्देश्य छात्रों में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना

गोवा सरकार की ‘तारे जमीन पर’ तारामंडल पहल का उद्देश्य छात्रों में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना
Modified Date: April 25, 2026 / 05:45 pm IST
Published Date: April 25, 2026 5:45 pm IST

पणजी, 25 अप्रैल (भाषा) गोवा सरकार ने छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “तारे जमीन पर” नामक सचल 360-डिग्री डिजिटल तारामंडल और एसटीईएम शिक्षा संपर्क कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत गहन और अनुभवात्मक शिक्षा प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत द्वारा 15 अप्रैल को शुरू की गई यह पहल ग्रामीण पीएम श्री स्कूलों में लागू की जाएगी, जिसमें सरकारी संस्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

सावंत ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षा से आगे बढ़कर छात्रों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कहा कि इस पहल में उन्नत डिजिटल प्रोजेक्शन सिस्टम से सुसज्जित एक हवा से भरा मोबाइल तारामंडल शामिल है, जो संवादात्मक खगोल विज्ञान सत्र प्रदान करता है।

सावंत ने कहा, “इसमें छात्रों के अंदर करके सीखने के दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने के लिए व्यावहारिक एसटीईएम किट भी शामिल हैं, जिससे वे व्यावहारिक अनुभव के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।”

इस कार्यक्रम का उद्देश्य गोवा भर के स्कूलों को, विशेष रूप से दूरस्थ और कम सुविधा वाले क्षेत्रों में स्थित स्कूलों को शामिल करना है, और यह कार्यक्रम विज्ञान शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने के लिए एक समर्पित सचल बस के माध्यम से संचालित होगा।

सत्र में भाग लेने वाले छात्रों और शिक्षकों ने कहा कि यह पहल दृश्य और व्यावहारिक शिक्षण के माध्यम से विज्ञान विषयों की समझ को काफी हद तक बढ़ाएगी।

कार्यक्रम के मार्गदर्शक रोहित निकम ने कहा कि “स्पार्क्स ऑफ क्यूरियोसिटी” पहल के तहत संचालित इस अभियान का उद्देश्य छात्रों को संवादात्मक अनुभवों के माध्यम से खगोल विज्ञान और विज्ञान के करीब लाना है।

उन्होंने कहा, “यहां का मुख्य आकर्षण 360-डिग्री डिजिटल तारामंडल है, जो ग्रामीण छात्रों के लिए ऐसे दुर्लभ अनुभवों को सुलभ बनाता है। इसके साथ ही, हम पाठ्यक्रम आधारित प्रदर्शनियां और पानी के रॉकेट प्रक्षेपण जैसी व्यावहारिक गतिविधियां भी प्रस्तुत करते हैं।”

निकम ने कहा कि यह कार्यक्रम पंजाब और कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे राज्यों सहित पूरे भारत में लगभग एक करोड़ लोगों तक पहुंच चुका है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में विज्ञान शिक्षा में मौजूद अंतर को पाटने में मदद मिली है।

भाषा प्रशांत रंजन

रंजन


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