शासन को बदलावों, वैश्विक अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए नये कौशल की जरूरत: पीके मिश्रा

शासन को बदलावों, वैश्विक अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए नये कौशल की जरूरत: पीके मिश्रा

शासन को बदलावों, वैश्विक अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए नये कौशल की जरूरत: पीके मिश्रा
Modified Date: April 2, 2026 / 08:51 pm IST
Published Date: April 2, 2026 8:51 pm IST

नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने बृहस्पतिवार को कहा कि मौजूदा समय में शासन-प्रशासन को तकनीकी बदलावों और वैश्विक अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए नये कौशल की जरूरत है।

मिश्रा ने देशभर के सरकारी कर्मचारियों की दक्षताओं, प्रतिबद्धता और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को मजबूत करने के मकसद से शुरू की गई राष्ट्रव्यापी पहल साधना सप्ताह को संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि दक्षता विकास अब केवल सीमित और नियमों पर आधारित प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि ‘आइगोट’ जैसे प्लेटफॉर्म की मदद से निरंतर चलने वाली और ‘कभी भी-कहीं भी’ सीखने की प्रणाली में बदल गया है।

क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) दो से आठ अप्रैल तक साधना (राष्ट्रीय उन्नति के लिए अनुकूल विकास और मानवीय योग्यता को मजबूत करना) सप्ताह का आयोजन कर रहा है।

मिश्रा ने कहा कि आज के समय में शासन-प्रशासन को तकनीकी बदलावों, जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और वैश्विक अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए नयी दक्षता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लगातार सीखते रहने से नवाचार, परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता और पेशेवर रवैया मजबूत होता है।

मिश्रा ने कहा कि प्रभावी लोक सेवा के लिए सही सोच और संवेदनशील होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि साधना सप्ताह एक सक्षम, समर्पित और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवा की ओर हो रहे बदलाव को और मजबूत करता है।

देशभर के प्रशिक्षण संस्थानों को आपस में जोड़े जाने का जिक्र करते हुए मिश्रा ने कहा कि क्षमता विकास आयोग ने इस पूरे तंत्र में एकरूपता और व्यापकता लाने का काम किया है।

सीबीसी अध्यक्ष एस राधा चौहान ने कहा कि कर्मयोगी की अवधारणा एक ऐसे लोक सेवक को दर्शाती है, जो विवेक को कर्म के साथ जोड़ता है और जो सहानुभूति तथा प्रासंगिक समझ के साथ शासन प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि साधना सप्ताह अधिकारियों को सेवा के अपने मूल उद्देश्य से पुनः जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की सचिव रचना शाह ने कहा कि मिशन कर्मयोगी पिछले पांच वर्षों में दक्षता विकास में एक मौलिक परिवर्तन ले आया है।

उन्होंने समय-समय पर होने वाले प्रशिक्षण से हटकर एक निरंतर, भूमिका-आधारित दक्षता ढांचे की ओर बदलाव पर प्रकाश डाला, जिसमें अब बड़े पैमाने पर अग्रिम पंक्ति के कर्मी भी शामिल हैं।

रचना शाह ने बताया कि ‘आइगोट’ प्लेटफॉर्म पर 1.5 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी पंजीकृत हैं, जहां आठ करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं और कई भाषाओं में 4,600 से अधिक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।

उन्होंने बताया कि 130 से अधिक दक्षता विकास योजनाएं विकसित की गई हैं और सीखने की प्रक्रिया को कार्य मूल्यांकन प्रणाली के साथ एकीकृत किया गया है।

कर्मयोगी भारत के अध्यक्ष श्री सुब्रमण्यम रामादोराई ने कहा कि आज का शासन तीव्र प्रौद्योगिकी परिवर्तन, सभ्यतागत ज्ञान और नागरिक-केंद्रित परिणामों पर मजबूत फोकस द्वारा आकार ले रहा है।

भाषा आशीष पारुल

पारुल


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