सड़क हादसे में मारे गए इंजीनियरिंग के छात्र के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश

सड़क हादसे में मारे गए इंजीनियरिंग के छात्र के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश

सड़क हादसे में मारे गए इंजीनियरिंग के छात्र के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश
Modified Date: July 3, 2026 / 04:58 pm IST
Published Date: July 3, 2026 4:58 pm IST

नयी दिल्ली, तीन जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने वर्ष 2017 में सड़क हादसे में मारे गए नेताजी सुभाष प्रौद्यागिकी संस्थान के चतुर्थ वर्ष के इंजीनियरिंग के एक छात्र के परिवार को एक करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

अदालत ने उसी हादसे में मारे गए इंजीनियरिंग तृतीय वर्ष के एक छात्र के परिवार को भी करीब 84 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने उस हादसे में मारे गए दोनों छात्रों के परिजनों की याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया। दोनों छात्रों के परिवारों ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा सितंबर 2020 में तय किये गए मुआवजे को बढ़ाने का अनुरोध किया था।

वरिष्ठ अधिवक्ता सुमीत वर्मा ने उच्च न्यायालय में पीड़ित परिवारों का पक्ष रखा।

न्यायाधिकरण ने प्रभलीन कौर और विनय खुराना के परिजनों को क्रमश: 38.50 लाख रुपये और 83.86 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था।

यह हादसा फरवरी 2017 में हुआ था, जब वे दोनों एक साझा मित्र की गाड़ी में दिल्ली जा रहे थे।

आरोप है कि बहुत तेज रफ़्तार से और लापरवाही से चलाई जा रही कार डिवाइडर की रेलिंग से टकरा गई, जिससे दोनों छात्रों की मौत हो गई।

आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने न्यायाधिकरण द्वारा तय किए गए मुआवज़े को कम करने का अनुरोध करते हुए अपील दायर की।

उच्च न्यायालय ने एक जुलाई को सुनाए गए फैसले में कहा कि दोनों मृत छात्र होनहार और काबिल थे, जिन्होंने जेईई परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने के बाद एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया था।

अदालत ने खुराना को सरकारी कंपनी से मिले नौकरी के प्रस्ताव और कौर की फ़ार्मास्युटिकल कंपनी में मानदेय आधारित इंटर्नशिप को संज्ञान में लेते हुए माना कि उनके परिवार वाले अधिक मुआवजे के हकदार हैं।

इसमें कहा गया है कि मुआवजे की गणना के लिए, मृत व्यक्ति की संभावित कमाई के मामले में दुर्घटना वाले साल, यानी 2017 को एक अहम मोड़ या आधार वर्ष माना जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने अपने आदेश में कहा, ‘‘ तदनुसार, विनय खुराना के मामले में मुआवज़ा 23,85,800 रुपये बढ़ाया जाता है और प्रभलीन कौर के मामले में मुआवज़ा 45,82,600 रुपये बढ़ाया जाता है।’’ इस प्रकार खुराना के परिवार को कुल 1,07,71,800 रुपये और कौर के परिवार को 84,32,600 रुपये का मुआवज़ा मिलेगा।

अदालत ने मुआवजे पर उचित ब्याज का आदेश देते हुए इस तथ्य पर संज्ञान लिया कि दुर्घटना को नौ साल और 2020 में पहला आदेश पारित होने के छह साल बीत चुके हैं।

फैसले में कहा गया, ‘‘ मामले के लंबे समय से लंबित रहने के मद्देनजर, यह उचित होगा कि न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए मूल मुआवज़े पर लागू होने वाला ब्याज नौ प्रतिशत सालाना बना रहे। यह स्पष्ट किया जाता है कि 6.75 प्रतिशत सालाना का ब्याज केवल बढ़ाई गई मुआवजे की राशि पर ही लागू होगा।’’

भाषा धीरज दिलीप

दिलीप


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