डिजिटल संप्रभुता मजबूत करने के लिए स्वदेशी सर्च इंजन विकसित करे सरकार : कांग्रेस सांसद नीरज डांगी

डिजिटल संप्रभुता मजबूत करने के लिए स्वदेशी सर्च इंजन विकसित करे सरकार : कांग्रेस सांसद नीरज डांगी

डिजिटल संप्रभुता मजबूत करने के लिए स्वदेशी सर्च इंजन विकसित करे सरकार : कांग्रेस सांसद नीरज डांगी
Modified Date: March 25, 2026 / 01:25 pm IST
Published Date: March 25, 2026 1:25 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) देश की डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करने के लिए राज्यसभा में कांग्रेस के नीरज डांगी ने बुधवार को एक स्वदेशी सर्च इंजन विकसित करने की जरूरत रेखांकित की ताकि देश गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे विदेशी कंपनियों पर निर्भरता से मुक्त हो सकें।

शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि 2025-26 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, चीन, रूस, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, चेक रिपब्लिक और यहां तक कि वियतनाम के पास भी अपना स्वदेशी सर्च इंजन है। इन देशों ने इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त की है और इन देशों में ये सर्च इंजन गूगल से अधिक लोकप्रिय होते हैं और बाजार में प्रमुख हिस्सेदारी रखते हैं।

उन्होंने कहा ‘‘इस तरह इन देशों ने अपनी डिजिटल संप्रभुता और स्थानीय आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी सर्च इंजन विकसित कर अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित किया और मजबूत बनाया है। यह सर्च इंजन बाजार हिस्सेदारी के साथ राष्ट्रीय हिस्सेदारी और डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करता है।’’

डांगी ने कहा कि हाल के कुछ वर्षों में चुनौतियां जरूर आईं लेकिन इन देशों ने विदेशी दबाव से बचने के लिए स्वदेशी तकनीक पर जोर दिया है जो आर्थिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देती हैं। भारत में स्थिति अधिक चिंताजनक है क्योंकि हमारी 140 करोड़ आबादी का अधिकांश डेटा विदेशी सर्च इंजनों की माध्यम से संग्रहित और विश्लेषित होता है। ‘‘गूगल एवं माइक्रोसॉफ्ट हमारे चेक प्वॉइंट बन चुके हैं।’’

उन्होंने कहा कि अगर अभी स्वदेशी सर्च इंजन या क्लाउड सॉफ्टवेयर नहीं बनाएंगे तो कोई भी भविष्य का भूराजनीतिक दबाव, अमेरिका भारत व्यापार युद्ध या अन्य ऐसी परिस्थिति देश को संकट में डाल सकती है। उन्होंने कहा कि तनाव बढ़ने पर अमेरिका या चीन अपने सर्च इंजन को भारत को सेवा देने से मना कर सकते हैं।

डांगी ने कहा कि 2025 में माइक्रोसाफ्ट में ईयू प्रतिबंध की वजह से एक भारतीय रिफाइनरी नारा की पूरी क्लाउड सेवाएं बंद कर दी थीं। तब अदालत में मुकदमा चला था और सरकार ने इसे चेतावनी संकेत माना था।

उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि तत्काल पहल कर सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की मदद से भारतीय सर्च इंजन विकास चैलेंज शुरू किया जाए। इसमें स्टार्टअप, आईआईटी और आईआईएम को प्राथमिकता दी जाए। डेटा लोकलाइजेशन हेतु सरकारी संस्थानों में स्वदेशी सर्च इंजन का इस्तेमाल जरूरी किया जाए।

इससे न केवल रोजगार में वृद्धि होगी बल्कि देश की डेटा गोपनीयता भी सुनिश्चित होगी।

भाषा मनीषा माधव

माधव


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