सरकार पेश करेगी महिला आरक्षण संबंधी विधेयक, विरोध की तैयारी में विपक्ष
सरकार पेश करेगी महिला आरक्षण संबंधी विधेयक, विरोध की तैयारी में विपक्ष
नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) सरकार बृहस्पतिवार को महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी, जिसका विपक्ष के कई दल विरोध करने और इसके परिसीमन से जुड़े प्रावधानों के खिलाफ वोट करने की तैयारी में हैं।
सरकार ‘संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026’ को एक बड़े सुधार के रूप में ला रही है। इसके साथ ही सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए एक विधेयक तथा केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 भी पेश करेगी।
इन तीनों विधेयकों को लोकसभा की आज की कार्यवाही में सूचीबद्ध किया गया है। लोकसभा के वर्तमान बजट सत्र के तहत तीन दिवसीय विशेष बैठक बुलाने का मकसद इन तीनों विधेयकों पर चर्चा और इन्हें पारित कराना है।
विधेयक पेश किए जाने से एक दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर कई विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुई जिसमें यह फैसला किया गया कि इसके परिसीमन से संबंधित प्रावधानों का पुरजोर विरोध किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों के आधार पर वर्ष 2029 से महिला आरक्षण लागू किया जाए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा था कि यदि 2029 में लोकसभा और विभिन्न विधानसभाओं के चुनाव महिला आरक्षण के पूर्ण रूप से लागू होने के साथ कराए जाते हैं तो भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत तथा जीवंत बनेगा।
देश की महिलाओं को लिखे एक पत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह भी कहा था कि जब महिलाएं नीति-निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करेंगी तब विकसित भारत की यात्रा और अधिक सशक्त एवं तेज होगी।
सरकार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को मूर्त रूप देने के लिए बृहस्पतिवार को जो संविधान संशोधन पेश करेगी, उसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है।
संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में कुल सदस्यों की संख्या के दो तिहाई के समर्थन की जरूरत होती है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास लोकसभा में फिलहाल यह आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
भाषा हक शोभना
शोभना

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