सरकार ने सीबीएसई के चेयरमैन और सचिव का तबादला किया, ओएसएम निविदा प्रक्रिया की जांच के आदेश

सरकार ने सीबीएसई के चेयरमैन और सचिव का तबादला किया, ओएसएम निविदा प्रक्रिया की जांच के आदेश

सरकार ने सीबीएसई के चेयरमैन और सचिव का तबादला किया, ओएसएम निविदा प्रक्रिया की जांच के आदेश
Modified Date: June 2, 2026 / 11:10 pm IST
Published Date: June 2, 2026 11:10 pm IST

नयी दिल्ली, दो जून (भाषा) केंद्र सरकार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को लेकर जारी विवाद पर मंगलवार को सख्त रुख अपनाते हुए दो शीर्ष अधिकारियों को हटा दिया और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की सीबीएसई द्वारा खरीद की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आदेश दिया।

सरकार ने यह कदम 12वीं कक्षा के लिए लागू डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में कथित अनियमितताओं के बाद उठाया है।

इसी बीच, सीबीएसई की ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली से प्रभावित झारखंड के 17 वर्षीय एक छात्र ने संसद की एक समिति के समक्ष प्रस्तुति दी। सूत्रों ने बताया कि सार्थक सिद्धांत ने ऑनलाइन मूल्यांकन की खातिर ‘वेंडर’ के चयन के लिए सीबीएसई की निविदा प्रक्रिया में विसंगतियों का उल्लेख किया और बोर्ड के समक्ष कई सवाल उठाए।

उन्होंने कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसद की शिक्षा, महिला बाल, युवा और खेल की स्थायी समिति के समक्ष सात पन्नों में अपने बिंदुओं को रखा। समिति के सदस्यों ने सार्थक की बातों को धैर्यपूर्वक सुना और सीबीएसई अधिकारियों से जवाब मांगा।

सीबीएसई ने इस बीच दावा किया कि ‘‘दुर्भावनापूर्ण तत्वों’’ ने सिलसिलेवार साइबर हमलों के माध्यम से उसके पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर सेवाओं को बाधित करने का प्रयास किया, जिसमें एक ऐसा हमला भी शामिल है जिसके कारण दो मिनट के भीतर प्लेटफॉर्म पर 15 लाख ‘हिट’ हुए और अनधिकृत रूप से फाइल हासिल करने के एक लाख से अधिक प्रयास किये गए।

सीबीएसई उस समय विवादों में घिर गया, जब 12वीं कक्षा के कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि बोर्ड द्वारा अपलोड की गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां उनकी लिखावट से मेल नहीं खातीं, जिससे ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली में उत्तर पुस्तिकाओं के मिलान में संभावित गड़बड़ी को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।

सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया और उनके स्थान पर क्रमशः वरिष्ठ नौकरशाह लोखंडे प्रशांत सीताराम और वरुण भारद्वाज को नियुक्त किया गया है।

इसके बाद, कैबिनेट सचिवालय ने एक परिपत्र जारी कर सीबीएसई द्वारा ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के लिए सेवाओं की खरीद से संबंधित मामलों की जांच करने के लिए एक सदस्यीय समिति गठित करने की घोषणा की।

इसके मुताबिक, समिति की अध्यक्षता क्षमता विकास आयोग की अध्यक्ष एस राधा चौहान करेंगी।

परिपत्र में कहा गया है कि चौहान को आवश्यकतानुसार अन्य विभागों के अधिकारियों की मदद हासिल करने का अधिकार दिया गया है, जबकि क्षमता विकास आयोग समिति को सचिवालय संबंधी सहायता प्रदान करेगा।

संबंधित परिपत्र के अनुसार, समिति केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

चौहान के नाम पर जारी परिपत्र को विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के साथ साझा किया गया है।

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा प्रक्रिया में ओएसएम प्रणाली के कार्यान्वयन को लेकर छात्रों और अभिभावकों ने चिंता जताई।

तकनीकी खामियों, शुल्क भुगतान में समस्या और सत्यापन एवं पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में देरी को लेकर बोर्ड को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है, जिसकी वजह से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई गई है।

सार्थक ने सीबीएसई के अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव (स्कूल शिक्षा) संजय कुमार के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय और बोर्ड के अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में समिति के समक्ष प्रस्तुति दी।

सीबीएसई ने समिति के सदस्यों को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें छात्रों के सामने आने वाली समस्याओं पर अपना पक्ष रखा गया था और सांसदों को आश्वासन दिया गया कि उसके पोर्टल से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ियों को ठीक कर लिया गया है और छात्रों के पास अब अपनी उत्तरपुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन की खातिर छह जून तक का समय है।

सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली पर विवाद के बीच, समिति ने 12वीं कक्षा की परीक्षाओं में इस प्रणाली के उपयोग के मुद्दे और इसके परिणामस्वरूप छात्रों को होने वाली समस्याओं पर चर्चा के लिए बोर्ड और स्कूल शिक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों को बुलाया था।

समिति ने शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के साथ नौवीं और 10वीं कक्षाओं में त्रि-भाषा फॉर्मूला लागू करने पर भी चर्चा की।

समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत में सार्थक की प्रस्तुति के बारे में जानकारी दी।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह सीबीएसई के जवाबों से संतुष्ट हैं, सिंह ने कहा, ”यह समिति को तय करना है।” उन्होंने त्रि-भाषा फॉर्मूले के मुद्दे पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और कहा, ‘मेरा मानना है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है।’

दिग्विजय ने संवाददाताओं द्वारा बैठक के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘समिति हमेशा से छात्रों के मुद्दों और उनकी समस्याओं पर ध्यान देती रही है। समिति ने ठीक यही किया है।’’

सीबीएसई ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि ‘‘‘सबसे हालिया घटना एक ‘डिनायल ऑफ सर्विस’ हमले का प्रयास है, जिसके कारण 2 मिनट के भीतर पोर्टल पर 15 लाख हिट हुए और अनधिकृत रूप से फाइल हासिल करने के 1 लाख से अधिक प्रयास किये गए।’’

सीबीएसई ने कहा कि पोर्टल वर्तमान में 8,000 से अधिक उपयोगकर्ताओं को सहायता प्रदान कर रहा है, और अपराह्न 3 बजे तक 16,000 से अधिक छात्रों ने सफलतापूर्वक अपनी प्रविष्टियां जमा कर दीं।

बोर्ड ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा ‘‘आज हजारों छात्रों ने सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन पोर्टल का उपयोग किया, लेकिन दुर्भावनापूर्ण तत्वों ने साइबर हमलों की एक शृंखला के माध्यम से सेवाओं को बाधित करने का प्रयास किया।’’

‘डिनायल-ऑफ-सर्विस’ हमला एक दुर्भावनापूर्ण साइबर खतरा है जो किसी मशीन, नेटवर्क या वेबसाइट को उसके लक्षित उपयोगकर्ताओं को अनुपलब्ध करता है।

छात्रों की प्रतिक्रिया के आधार पर, सीबीएसई ने कहा कि उसने प्लेटफॉर्म को और बेहतर बनाया है, जिसमें सत्र की समय सीमा बढ़ाना भी शामिल है, ताकि प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक और सुगम हो सके।

भाषा धीरज सुभाष

सुभाष


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