गुजरात: व्यक्ति ने सरकार से बांग्लादेश में जन्मी पत्नी को निर्वासित न करने की अपील की

गुजरात: व्यक्ति ने सरकार से बांग्लादेश में जन्मी पत्नी को निर्वासित न करने की अपील की

गुजरात: व्यक्ति ने सरकार से बांग्लादेश में जन्मी पत्नी को निर्वासित न करने की अपील की
Modified Date: June 14, 2026 / 10:20 pm IST
Published Date: June 14, 2026 10:20 pm IST

आणंद (गुजरात), 14 जून (भाषा) गुजरात के आणंद जिले के एक व्यक्ति ने राज्य सरकार से बांग्लादेश में जन्मी पत्नी को निर्वासित नहीं करने की अपील की है। उसका दावा है कि उसकी पत्नी ने हिंदू धर्म अपना लिया है और यदि उसे उसके मूल देश वापस भेजा गया तो उसकी (महिला) जान को खतरा हो सकता है।

यह मामला गुजरात पुलिस द्वारा अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ चलाए जा रहे राज्यव्यापी अभियान ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ के बीच सामने आया है। महिला को करीब दो सप्ताह पहले वैध दस्तावेजों के बिना भारत में रहने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।

राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस महीने अब तक गुजरात में 600 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को देश में अवैध रूप से रहने के आरोप में पकड़ा गया है। इनमें से करीब 60 लोगों को आणंद जिले में हिरासत में लिया गया।

हिरासत में लिए गए लोगों में एक महिला भी शामिल है, जिसकी पहचान उसके पति ने काजल के रूप में की है।

हिरासत में ली गई महिला के पति के अनुसार, वह (महिला) करीब एक दशक पहले अवैध रूप से भारत आई थी और बाद में उसने आणंद निवासी तरुण पटेल से विवाह कर लिया था।

आणंद जिले के लंभवेल गांव निवासी पटेल ने बताया कि वर्ष 2012-13 में उनकी मुलाकात फेसबुक के माध्यम से काजल से उस समय हुई थी, जब वह बांग्लादेश में रहती थी। समय के साथ दोनों के बीच प्रेम संबंध विकसित हो गया।

पटेल ने संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया कि काजल ने उनसे (पटेल) कानूनी रूप से विवाह करने के लिए बांग्लादेश में पासपोर्ट बनवाने का प्रयास किया था लेकिन उसे पासपोर्ट नहीं मिल सका।

उन्होंने कहा कि परिवार की ओर से किसी अन्य व्यक्ति से विवाह करने का दबाव बढ़ने पर वह अवैध रूप से भारत आ गई और आणंद पहुंची।

पटेल ने कहा, ‘‘तब से हम पति-पत्नी के रूप में साथ रह रहे हैं और हमारे दो बच्चे हैं। इनमें एक की उम्र आठ वर्ष और दूसरे की उम्र दो वर्ष है।’’

पटेल के अनुसार, भारत आने के बाद दोनों ने हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह किया था। उन्होंने दावा किया कि काजल ने हिंदू परंपराओं को अपना लिया है और नियमित रूप से मंदिरों में दर्शन करने जाती है।

पटेल ने बताया कि आणंद स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) ने हाल ही में उनकी पत्नी को इस बात का पता चलने के बाद हिरासत में ले लिया कि वह वैध दस्तावेजों के बिना भारत में रह रही थी। उन्होंने कहा कि उसके खिलाफ अब निर्वासन की प्रक्रिया की जा रही है।

पटेल ने गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी से मानवीय आधार पर उनकी पत्नी को निर्वासित नहीं करने की अपील की।

उन्होंने कहा, ‘‘उसने हिंदू धर्म अपना लिया है और संभव है कि उसका परिवार उसे स्वीकार न करे। मुझे डर है कि वहां कट्टरपंथी तत्वों से उसकी जान को खतरा हो सकता है। यदि हमारी पत्नी को बच्चों से अलग कर दिया गया तो हमारे दोनों बच्चों का क्या होगा?’’

पटेल ने कहा कि उनकी पत्नी केवल उनसे विवाह करने के लिए अवैध रूप से भारत आई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए जो भी कानूनी प्रक्रिया आवश्यक होगी, उसका पालन करने के लिए हम तैयार हैं। मेरी अपील है कि उसे निर्वासित नहीं किया जाए और उसके मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए।’’

परिवार का दावा है कि आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक काजल को फिलहाल एक महिला आश्रय गृह में रखा गया है। उसके पति ने कहा कि करीब दो सप्ताह पहले हिरासत में लिए जाने के बाद से उनके बच्चे अपनी मां से नहीं मिल पाए हैं।

दंपति के बड़े बेटे ध्यान ने भी अधिकारियों से अपनी मां को रिहा करने की अपील की।

ध्यान ने कहा कि वह अपनी मां के बिना नहीं रह सकता और उन्हें जल्द से जल्द रिहा किया जाना चाहिए।

यह मामला ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ के तहत अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ गुजरात पुलिस की कार्रवाई के बीच सामने आया है।

आणंद के पुलिस अधीक्षक जी. जी. जसानी से इस संबंध में प्रतिक्रिया के लिए संपर्क नहीं हो सका।

अहमदाबाद रेंज के पुलिस महानिरीक्षक राघवेंद्र वत्स ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उन्हें इस विशेष मामले की जानकारी नहीं है।

वत्स ने कहा, ‘‘मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। आणंद के पुलिस अधीक्षक से विवरण प्राप्त करने के बाद ही मैं इस पर टिप्पणी करूंगा।’’

भाषा

राखी प्रशांत

प्रशांत


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