गुजरात: एआई के दुरुपयोग पर अंकुश के अनुरोध वाली याचिका पर मेटा, एक्स, गूगल को नोटिस
गुजरात: एआई के दुरुपयोग पर अंकुश के अनुरोध वाली याचिका पर मेटा, एक्स, गूगल को नोटिस
अहमदाबाद, 15 अप्रैल (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने ‘मेटा इंडिया’, ‘गूगल’, ‘एक्स’, ‘रेडिट’ और ‘स्क्रिब्ड’ जैसी प्रौद्योगिकी कंपनियों को एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिका में ‘डीपफेक’ वीडियो और तस्वीरों के निर्माण और प्रसार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक मजबूत नियामक तंत्र के गठन का अनुरोध किया गया है।
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी. एन. रे की एक खंडपीठ ने इन प्रौद्योगिकी कंपनियों को नोटिस जारी करते हुए आठ मई को जवाब देने को कहा। अदालत ने प्रतिवादी मध्यस्थों को यह भी निर्देश दिया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के नियमों के प्रावधानों का सख्ती से पालन करते हुए गैरकानूनी सामग्री को हटाने से संबंधित बेहतर समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई के लिए उन्हें सहयोग पोर्टल पर लाया जाए।
अदालत ने हाल में पारित और इस सप्ताह उपलब्ध कराए गए एक आदेश में कहा, ‘‘प्रतिवादी मध्यस्थों की प्रभावी और सार्थक प्रतिक्रियाएं/कार्रवाई, आवश्यक जांच-पड़ताल और सावधानी से जुड़ी कानूनी बाध्यताओं को वैधानिक ढांचे के तहत उन पर लागू करना महत्वपूर्ण होगा।’’
अपने हलफनामों में केंद्र और गुजरात सरकारों ने अदालत को लगातार देरी, बार-बार प्रक्रियात्मक बाध्यताओं और कुछ प्रौद्योगिकी मंचों द्वारा उन्हें जारी किए गए वैध नोटिस का पालन नहीं करने के बारे में सूचित किया।
पिछली सुनवाई के दौरान जारी नोटिस के जवाब में अपने हलफनामे में केंद्र ने अदालत को सूचित किया कि अक्टूबर 2024 में उसने सभी अधिकृत कानून प्रवर्तन एजेंसियों और मध्यस्थों को एक ही मंच पर लाकर गैरकानूनी सामग्री के खिलाफ तत्काल, समन्वित और समयबद्ध कार्रवाई की सुविधा के लिए सहयोग पोर्टल बनाया था।
इसका उद्देश्य गैरकानूनी रूप से कृत्रिम रूप से उत्पन्न जानकारी को शीघ्रता से हटाना और दोषी उपयोगकर्ताओं की पहचान के लिए ग्राहक जानकारी, लॉग और न्यायिक साक्ष्य तक पहुंच प्रदान करना है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अदालत को सूचित किया कि मेटा और गूगल जैसे कुछ मध्यस्थों ने अनुपालन कार्यों की गति, दक्षता और पता लगाने की क्षमता में काफी सुधार किया है, लेकिन अन्य को अब तक सहयोग पोर्टल के साथ जोड़ा या पूरी तरह से एकीकृत नहीं किया गया है।
मंत्रालय ने विशेष रूप से कृत्रिम रूप से उत्पन्न जानकारी समेत गैरकानूनी सामग्री को भी शामिल किया है, जिसके संबंध में उसने ‘एक्स’ सूचित किया था लेकिन उसकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
मंत्रालय ने अदालत को बताया कि कृत्रिम रूप से तैयार की गई जानकारी सहित गैरकानूनी सामग्री रखने के लिए 2024 और 2026 के बीच ‘एक्स’ को कुल 94 सूचनाएं दी गईं, लेकिन केवल 13 सूचनाओं के खिलाफ औपचारिक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई।
जनहित याचिका में याचिकाकर्ता विकास नायर ने डिजिटल मंच पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित वीडियो के व्यापक निर्माण और प्रसार से संबंधित मुद्दों को उजागर किया है। याचिकाकर्ता के अनुसार ये सार्वजनिक व्यवस्था और एक स्वस्थ लोकतंत्र के कामकाज के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
उन्होंने डीपफेक/सिंथेटिक/डिजिटल रूप से छेड़छाड़ कर बनाए गए मीडिया एआई जनित सामग्री के खिलाफ विशिष्ट कानून या नियामक तंत्र बनाने में सरकार की निष्क्रियता का भी मुद्दा उठाया।
याचिका में कहा गया है कि तेजी से बदलती प्रौद्योगिकी को विनियमित करने वाले कानूनों को बनाने की आवश्यकता है।
भाषा सुरभि माधव
माधव

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