मार्च में भारत का सबसे प्रदूषित शहर रहा गुड़गांव: रिपोर्ट
मार्च में भारत का सबसे प्रदूषित शहर रहा गुड़गांव: रिपोर्ट
नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) मार्च महीने में गुड़गांव भारत का सबसे प्रदूषित शहर था और देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से चार शहर हरियाणा के थे। ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (सीआरईए) की एक नई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
मार्च में घोषित शीर्ष 10 प्रदूषित शहरों की सूची में बहादुरगढ़, फरीदाबाद, सिंगरौली, मंडीदीप, गाजियाबाद, मानेसर, भिवाड़ी, नोएडा और नंदेसरी भी शामिल थे। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, गाजियाबाद सबसे प्रदूषित शहर था।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘मार्च में गुड़गांव भारत का सबसे प्रदूषित शहर था, जिसका महीने में पीएम2.5 का औसत 116 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर था। भारत के सबसे प्रदूषित 10 शहरों में हरियाणा के चार शहर थे, इसके बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के दो-दो शहर और राजस्थान और गुजरात का एक-एक शहर था।’’
इसमें कहा गया, ‘‘हरियाणा में अधिक राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (एनएएक्यूएस) वाले ज्यादा शहर थे, जहां 24 में से नौ शहरों में पीएम2.5 एनएएक्यूएस से ज़्यादा दर्ज किया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश का नंबर आता है, जिसके 21 में से आठ शहरों में पीएम2.5 एनएएक्यूएस से अधिक रहा।’’
भारतीय राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के एक विश्लेषण में पता चला कि कुछ ही शहर एनसीएपी लागू होने के सात साल बाद भी उसके लक्ष्य हासिल कर पाए।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘सुधार दिखाने वाले शहरों में, उत्तर प्रदेश के नौ शहरों में एनसीएपी बेसलाइन साल (2017-18) की तुलना में पीएम10 स्तर में 40 प्रतिशत से ज़्यादा की कमी दर्ज की गई। महाराष्ट्र के तीन शहरों और पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, पंजाब और राजस्थान के दो-दो शहरों और तमिलनाडु, झारखंड, नगालैंड, जम्मू और कश्मीर, छत्तीसगढ़, बिहार और असम के एक-एक शहर में भी इसी तरह की कमी देखी गई।’’
देहरादून (उत्तराखंड) में 2017-18 के मुकाबले पीएम10 स्तर में सबसे ज़्यादा 75 प्रतिशत की कमी आई, जबकि विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) में सबसे ज़्यादा 73 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसी समय में दिल्ली में पीएम10 के स्तर में 17 प्रतिशत की कमी आई।
सीआरईए के विश्लेषक मनोज कुमार ने कहा, ‘‘कई शहर अब भी संशोधित एनसीएपी लक्ष्यों को प्राप्त करने से बहुत दूर हैं, और कुछ में तो प्रदूषण का स्तर भी बढ़ा है, जो गंभीर चिंता की बात है।’’
भाषा वैभव मनीषा
मनीषा

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