सिर कटा लिया पर झुकाया नहीं, गुरू तेगबहादुर शहीदी दिवस 

सिर कटा लिया पर झुकाया नहीं, गुरू तेगबहादुर शहीदी दिवस 

सिर कटा लिया पर झुकाया नहीं, गुरू तेगबहादुर शहीदी दिवस 
Modified Date: November 29, 2022 / 08:27 pm IST
Published Date: November 24, 2017 6:59 am IST

 

वेब डेस्क। आज पूरा देश और दुनिया भर में फैले सिख धर्मावलंबी समेत भारतीय समुदाय शहीदी दिवस मना रहा है। 

 

24 नवंबर को शहीदी दिवस के रूप में मनाने के पीछे आखिर क्या कारण है, ये जानना बेहद जरूरी है, इसलिए आज हम इतिहास के पन्नों को पलटते हैं और आपको ले चलते हैं 24 नवंबर 1675 की उस तारीख को, जब सिख धर्म के नौवें गुरू श्रीगुरू तेगबहादुर जी ने अपना बलिदान दिया था। गुरू तेग बहादुर का जन्म 1 अप्रैल 1621 को हुआ था और नौवें सिख गुरू के रूप में उन्होंने प्रथम गुरू गुरू नानक देव जी के बताए मार्ग का अनुसरण करके इस पद की गरिमा में चार चांद लगाए। सिख धर्म को समृद्ध करने में अमूल्य योगदान देने वाले नौवें गुरू श्रीतेगबहादुर ने अनेकानेक पद्यों की रचना की, जिनमें से 115 पवित्र सिख धर्मग्रंथ गुरू ग्रंथ साहिब में सम्मिलित हैं। 

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उन दिनों मुगल शासक औरंगजेब का शासन था और अपने शासन के उत्तरार्ध में वो जबरन धर्मपरिवर्तन पर जनता को विवश कर रहा था। मुगल सल्तनत के इस कदम के खिलाफ गुरू तेगबहादुर ने बुलंद आवाज़ उठाई और हिंदुओं को बलपूर्वक इस्लाम स्वीकार करने पर मजबूर किए जाने का विरोध किया। बताया जाता है कि जब ये बात औरंगजेब को बताई गई वो गुस्से से कांपने लगा और गुरू तेगबहादुर को इस्लाम कुबूल करने के फरमान जारी कर दिए। गुरू तेगबहादुर ने इस फरमान को खारिज कर दिया और धर्म व मानवता की रक्षा के लिए हर कीमत चुकाने को तैयार रहने का संदेश दे दिया। गुरू तेगबहादुर ने कहा कि वो अपना सीस (सिर) कटा सकते हैं लेकिन केश (मान) नहीं कटा सकते। 


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