उच्च न्यायालय ने आइसक्रीम विक्रेता के खिलाफ पीछा करने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी रद्द की
उच्च न्यायालय ने आइसक्रीम विक्रेता के खिलाफ पीछा करने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी रद्द की
नयी दिल्ली, 22 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने पक्षों के बीच हुए समझौते के आधार पर एक आइसक्रीम विक्रेता के खिलाफ ताक-झांक और पीछा करने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया है। साथ ही, अदालत ने मॉडल टाउन पुलिस स्टेशन के सभी कर्मियों को आइसक्रीम खिलाने के उसके ‘परोपकारी व्यवहार’ की भी सराहना की है।
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने कहा कि चूंकि मामले में स्वैच्छिक समझौता हो गया है, इसलिए याचिकाकर्ता के खिलाफ 2018 में दर्ज प्राथमिकी की सुनवाई जारी रखना निरर्थक होगा।
अदालत ने 13 मार्च को सुनाए गए आदेश में कहा, “इसलिए यह याचिका स्वीकार की जाती है और पुलिस थाना मॉडल टाउन में दिनांक 20 जनवरी 2018 को तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354(सी)/354(डी)/385/384 के तहत दर्ज प्राथमिकी और उससे संबंधित सभी कार्यवाही रद्द की जाती हैं।”
अदालत ने टिप्पणी की, “चूंकि याचिकाकर्ता आइसक्रीम विक्रेता है, इसलिए परोपकारी भावना के तहत वह जांच अधिकारी से समन्वय करने के बाद एक सप्ताह के भीतर मॉडल टाउन थाने के सभी कर्मचारियों को आइसक्रीम बांटना चाहता है। यह अदालत उसके नेक व्यवहार की सराहना करती है।”
पीड़िता ने बताया कि जनवरी में हुए समझौते के अनुसार, याचिकाकर्ता ने उसे 45,000 रुपये की समझौता राशि दी थी।
उसने कहा कि अब उसकी शादी हो चुकी है, उसका एक बच्चा है और उसे प्राथमिकी रद्द किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।
भाषा जितेंद्र दिलीप
दिलीप

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