उच्च न्यायालय ने निजी विद्यालयों को शुल्क विनियमन समिति गठित करने के आदेश को स्थगित किया
उच्च न्यायालय ने निजी विद्यालयों को शुल्क विनियमन समिति गठित करने के आदेश को स्थगित किया
नयी दिल्ली, 28 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए निजी विद्यालयों को ‘स्कूल स्तरीय फीस विनियमन समिति’ (एसएलएफआरसी) गठित करने के दिल्ली सरकार के आदेश का अनुपालन शनिवार को स्थगित कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान, एसएलएफआरसी का गठन स्थगित रहेगा और स्कूल शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 के लिए वही फीस वसूलने के हकदार होंगे जो उन्होंने पिछले शैक्षणिक वर्ष में वसूली थी।
पीठ ने कहा कि किसी भी प्रकार की अत्यधिक फीस को कानून के अनुसार विनियमित किया जाएगा।
पीठ ने यह आदेश कई स्कूल संघों की याचिकाओं पर दिया। इन याचिकाओं में दिल्ली सरकार द्वारा एक फरवरी को जारी उस अधिसूचना पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था जिसमें विद्यालयों को 10 दिनों के भीतर एसएलएफआरसी गठित करने को कहा गया था।
याचिकाकर्ताओं में दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी, एक्शन कमेटी अनएडेड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स, फोरम ऑफ माइनॉरिटी स्कूल्स, फोरम फॉर प्रमोशन ऑफ क्वालिटी एजुकेशन फॉर ऑल, रोहिणी एजुकेशनल सोसाइटी और एसोसिएशन ऑफ पब्लिक स्कूल्स शामिल हैं।
अदालत ने कहा, ‘याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान एसएलएफआरसी के गठन को स्थगित करना उचित होगा, क्योंकि इस पर अंतिम निर्णय 12 मार्च, 2026 को होगा।’
विद्यालयों ने दावा किया कि यह अधिसूचना कानूनी रूप से टिकती नहीं है क्योंकि इसने दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम में एसएलएफआरसी के गठन के लिए निर्धारित समयसीमा को बदल दिया है।
सरकार ने हालांकि कहा कि अधिनियम में दी गई ‘तिथियां’ ना तो ‘अपरिवर्तनीय’ हैं और न ही इसकी ‘बुनियादी संरचना’ का हिस्सा हैं, इसलिए इन समय-सीमाओं में मामूली फेरबदल मान्य होगा।
सरकार ने कहा कि अधिनियम का उद्देश्य विद्यालयों के व्यवसायीकरण और मुनाफाखोरी को रोकना है और अधिसूचना इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए लायी गई है तथा विद्यालयों को कोई अपूरणीय क्षति नहीं होगी।
एक फरवरी को, दिल्ली सरकार ने दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम के क्रियान्वयन को ‘सुचारू’ बनाने के लिए एक राजपत्र अधिसूचना जारी की थी। दिल्ली सरकार ने यह अधिसूचना उच्चतम न्यायालय द्वारा उसके नये फीस निर्धारण कानून को लेकर सवाल उठाने के बाद जारी की थी।
अधिसूचना के अनुसार, प्रत्येक स्कूल को आदेश के प्रकाशन के 10 दिनों के भीतर एक विद्यालय-स्तरीय फीस विनियमन समिति (एसएलएफआरसी) गठित करने का निर्देश दिया गया था।
भाषा अमित संतोष
संतोष

Facebook


