21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक की दहलीज पर भारत: मोदी

21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक की दहलीज पर भारत: मोदी

21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक की दहलीज पर भारत: मोदी
Modified Date: April 13, 2026 / 05:41 pm IST
Published Date: April 13, 2026 5:41 pm IST

(तस्वीर सहित)

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक की दहलीज पर है क्योंकि संसद उस समय ‘‘नया इतिहास’’ रचेगी जब 2029 से महिला आरक्षण अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए, इस सप्ताह इसमें संशोधन किया जाएगा।

मोदी ने 16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के तीन दिवसीय सत्र से पहले यहां आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में कहा कि इस कानून के लागू होने से अतीत की परिकल्पनाएं साकार होंगी और भविष्य के संकल्प पूरे होंगे। उन्होंने शासन में महिलाओं के योगदान की सराहना की और जोर दिया कि उनमें से कई बड़ी भूमिकाओं के लिए तैयार और उत्सुक हैं।

मोदी ने सम्मेलन में कहा, ‘‘हमारे देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है। ऐसा नया इतिहास, जो अतीत की परिकल्पनाओं को साकार करेगा और भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा। यह ऐसे भारत का संकल्प है, जो समतावादी हो, जिसमें सामाजिक न्याय केवल नारा न होकर हमारी कार्य संस्कृति और निर्णय प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा हो।’’

उन्होंने यह भी कहा कि जब 2023 में यह कानून पेश किया गया था तब इसे सभी दलों की सर्वसम्मति से पारित किया गया था और इसे 2029 तक लागू करने की विशेष रूप से विपक्ष की ओर से सामूहिक मांग उठी थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यों की विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक, दशकों के इंतजार को समाप्त करने का समय 16, 17 और 18 अप्रैल है, जब संशोधनों पर विचार करने और उन्हें पारित करने के लिए विस्तारित बजट सत्र निर्धारित किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘2023 में नयी संसद में हमने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के रूप में पहला कदम उठाया था…हमारे राष्ट्र की विकास यात्रा में इन महत्वपूर्ण पड़ावों के बीच, भारत 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक निर्णय लेने की दहलीज पर खड़ा है।’’

मोदी ने कहा, ‘‘मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहता हूं कि यह फैसला हमारे समय के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक होगा। यह फैसला महिला सशक्तिकरण को समर्पित होगा और नारी शक्ति एवं नारी सम्मान के प्रति सच्चे आदर का प्रतीक होगा।’’

संसद ने सितंबर 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण कानून के नाम से जाना जाता है। यह लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस अधिनियम में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीट आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है।

लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान 2023 में संविधान संशोधन के जरिए किया गया था।

मौजूदा कानून के तहत महिलाओं के लिए आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता, क्योंकि इसे 2027 की जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने से जोड़ा गया था।

इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में बदलाव जरूरी है। इसी वजह से सरकार ने कानून में संशोधन पारित कराने के लिए बजट सत्र की अवधि का विस्तार किया गया है।

महिला आरक्षण कानून में प्रस्तावित संशोधन पारित होने के बाद लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी, जिनमें से 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को समय पर लागू किया जाना चाहिए ताकि महिलाओं की भागीदारी देश के लोकतंत्र को मजबूत कर सके।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा प्रयास है, और हमारी प्राथमिकता भी है, इस बार भी, ये काम संवाद, सहयोग और सहभागिता से हो।’’

इस मुद्दे पर महिलाओं के बीच उत्साह का उल्लेख करते हुए, मोदी ने कहा कि देश भर की महिलाएं विधानसभाओं और लोकसभा तक पहुंचने की अपनी आकांक्षाओं को व्यक्त कर रही हैं, और उनके सपनों को नए पंख मिलने जा रहे हैं और देश में एक सकारात्मक माहौल का निर्माण हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं सभी महिलाओं से अपील करता हूं कि वे इस पूरी प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भागीदारी बनाए रखें और अपने सांसदों से मिलकर अपने विचार और अपेक्षाएं साझा करें।’’

प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर संविधान सभा तक महिलाओं के योगदान पर प्रकाश डालते हुए स्वतंत्र भारत की नींव रखने में उनकी अपार भूमिका को याद किया।

उन्होंने कहा, ‘‘जिन महिलाओं को प्रतिनिधित्व के अवसर मिले, उन्होंने राष्ट्र के लिए उत्कृष्ट कार्य किया है। आज भी हमारे देश में राष्ट्रपति से लेकर वित्त मंत्री तक, महिलाएं इतने महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक, महिलाएं जहां भी रही हैं, उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है।’’

पंचायती राज संस्थाओं को महिला नेतृत्व का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए मोदी ने कहा कि वर्तमान में 14 लाख से अधिक महिलाएं स्थानीय सरकारी निकायों में सफलतापूर्वक काम कर रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘लगभग 21 राज्यों में तो पंचायतों में उनकी भागीदारी करीब-करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। राजनीति और सामाजिक जीवन में लाखों महिलाओं की यह सक्रिय भागीदारी दुनिया के अग्रणी नेताओं और राजनीतिक विशेषज्ञों को भी आश्चर्यचकित करती है। इससे पूरे भारत का बहुत गौरव बढ़ता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जल जीवन मिशन की सफलता एक ऐसा उदाहरण है जहां पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।’’

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि स्थानीय निकायों और संस्थाओं में वर्षों से काम कर रही लाखों महिलाओं के पास व्यापक अनुभव है और वे बड़ी भूमिकाओं के लिए तैयार और उत्सुक हैं।

मोदी ने कहा, ‘‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने से ऐसी सभी महिलाओं के जीवन में एक बड़ा अवसर मिलेगा। पंचायत से संसद तक का सफर आसान हो जाएगा।’’

मोदी ने देश की हर मां, बहन और बेटी को आश्वासन दिया कि देश उनकी आकांक्षाओं को समझता है और उनके सपनों को साकार करने के लिए हर आवश्यक कदम उठा रहा है।

उन्होंने कहा, “देश की नारी शक्ति ने कड़ी मेहनत, साहस और आत्मविश्वास के बल पर नयी ऊंचाइयों को छुआ है। हमें सामूहिक रूप से इस शक्ति को नयी ऊर्जा प्रदान करनी चाहिए और उनके लिए अवसरों का विस्तार करना चाहिए।”

विकसित भारत की राह में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि उनकी सरकार ने 2014 से महिलाओं के जीवन चक्र के हर चरण के लिए योजनाएं बनाई हैं।

उन्होंने बालिकाओं और महिलाओं के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को गिनाते हुए कहा, ‘हमने कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान शुरू किया, गर्भावस्था के दौरान उचित पोषण के लिए मातृ वंदन योजना के तहत 5,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की और बेटियों की शिक्षा का समर्थन करने के लिए उच्च ब्याज वाली सुकन्या समृद्धि योजना शुरू की।’

भाषा आशीष मनीषा

मनीषा


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