भारतीय मूल की पद्मा विश्वनाथन अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार-2026 की दौड़ में शामिल
भारतीय मूल की पद्मा विश्वनाथन अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार-2026 की दौड़ में शामिल
नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) भारतीय मूल की कनाडाई-अमेरिकी लेखिका पद्मा विश्वनाथन ने पुर्तगाली भाषा के एक उपन्यास के अंग्रेजी अनुवादक के रूप में 2026 के अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की दौड़ में जगह बनायी है।
ब्राजील की लेखिका एना पाउल माइया की रचना ‘ऑन अर्थ एज़ इट इज बिनीथ’, जिसे ज्यूरी ने ‘‘ब्राजील की दूरदराज की एक कॉलोनी के इर्दगिर्द घूमते एक क्रूर, मार्मिक और सम्मोहक लघु उपन्यास’’ के रूप में वर्णित किया है, जहां न्याय और क्रूरता के बीच की सीमाएं ध्वस्त हो जाती हैं।
ये उपन्यास प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान के लिए दुनिया भर के छह दावेदारों में से एक है।
लेखक और अनुवादक के बीच समान रूप से विभाजित होने वाला 50,000 पाउंड का वार्षिक पुरस्कार पिछले वर्ष कन्नड़ लेखिका बानू मुश्ताक और अनुवादक दीपा भास्थी ने लघु कहानी संग्रह ‘हार्ट लैंप’ के लिए जीता था।
प्रत्येक चयनित पुस्तक को 5,000 पाउंड का पुरस्कार मिलना तय है, जिसे पुस्तक के लेखक और अंग्रेजी अनुवादक के बीच 50-50 के अनुपात में विभाजित किया जाएगा।
मंगलवार को घोषित इस सूची में महिलाओं का दबदबा है, जिसमें छह लेखकों में से पांच और छह अनुवादकों में से चार महिलाएं हैं। ये लेखक और अनुवादक आठ देशों – ब्राजील, बुल्गारिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, ताइवान, ब्रिटेन और अमेरिका का प्रतिनिधित्व करते हैं।
विजेता पुस्तक की घोषणा 19 मई को लंदन के टेट मॉडर्न में आयोजित एक समारोह में की जाएगी।
भाषा शफीक देवेंद्र
देवेंद्र

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