मानव ‘प्लेसेंटा’ के काम करने की प्रक्रिया पता लगाने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने तैयार की चिप

मानव ‘प्लेसेंटा’ के काम करने की प्रक्रिया पता लगाने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने तैयार की चिप

मानव ‘प्लेसेंटा’ के काम करने की प्रक्रिया पता लगाने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने तैयार की चिप
Modified Date: July 4, 2026 / 05:25 pm IST
Published Date: July 4, 2026 5:25 pm IST

(पायल बनर्जी)

नयी दिल्ली, चार जुलाई (भाषा) बच्चे के पहली सांस लेने से पहले उसका जीवन प्लेसेंटा नामक एक असाधारण अंग पर निर्भर करता है, जिसके बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है।

बच्चे को जीवित रखने वाली पहली प्रणाली के रूप में काम करने वाला प्लेसेंटा शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाता है, अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है, गर्भ में पल रहे शिशु की रक्षा करता है और गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए जरूरी हार्मोन बनाता है।

मनुष्य के विकास में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद इसके बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान इसके बारे में जानकारी हासिल करना मुश्किल होता है। लेकिन अब इस रहस्य की कुछ हद तक परतें खुल सकती हैं।

आईसीएमआर-राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान, मुंबई के शोधकर्ताओं ने आईआईटी बॉम्बे के सहयोग से स्वदेशी प्रयोगशाला में विकसित “प्लेसेंटा-ऑन-चिप” प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जो मां और गर्भ में पल रहे बच्चे के बीच काम करने वाले प्लेसेंटा के प्रमुख कार्यों को दोहराता है।

‘बायोफैब्रिकेशन’ नामक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में एक माइक्रोफिजियोलॉजिकल प्रणाली का वर्णन किया गया है, जो मां और भ्रूण के बीच की संरचना और कार्यप्रणाली की नकल करता है।

यह उपकरण मानव प्लेसेंटा के कई महत्वपूर्ण कार्यों को दोहराता है, जिनमें हार्मोन बनाना, पोषक तत्वों का स्थानांतरण, अपशिष्ट पदार्थों का प्रवेश और निकास जैसे काम शामिल हैं। ये कार्य गर्भावस्था को बनाए रखने वाली सबसे महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं में शुमार हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म गर्भावस्था से जुड़े हार्मोन बनाता है, मां की ओर से भ्रूण की ओर ग्लूकोज पहुंचाता है, यूरिया जैसे अपशिष्ट पदार्थों को हटाता है और गर्भकालीन मधुमेह जैसी अधिक रक्त शर्करा वाली स्थितियों में प्रतिक्रिया देता है।

इन गुणों की वजह से यह प्लेटफॉर्म प्लेसेंटा के काम करने के तरीके को समझने, गर्भावस्था के दौरान होने वाली समस्याओं का अध्ययन करने, दवाएं मां से बच्चे तक पहुंचने की प्रक्रिया को जानने और मनुष्यों से जुड़े ज्यादा सटीक शोध करने में मददगार हो सकता है।

आईसीएमआर-राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान में वैज्ञानिक और अध्ययन के लेखकों में से एक दीपक मोदी ने कहा, “हम सभी का जन्म से पहले जीवित रहना प्लेसेंटा पर निर्भर है, फिर भी इसके बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है।”

उन्होंने कहा, “प्लेसेंटा मां और बच्चे के बीच एक सुरक्षा परत की तरह काम करता है। इस अंग के मुख्य कामों को एक चिप पर तैयार करके हम शोधकर्ताओं को ऐसा मंच देना चाहते हैं, जिससे गर्भावस्था को बेहतर ढंग से समझने, मां और बच्चे के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और जहां संभव हो, वहां पशुओं पर होने वाले प्रयोगों को कम करने में मदद मिल सके।”

भाषा जोहेब पवनेश

पवनेश


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