भारत के विकसित राष्ट्र बनने का मार्ग समावेशी विकास पर आधारित हो: सीतारमण
भारत के विकसित राष्ट्र बनने का मार्ग समावेशी विकास पर आधारित हो: सीतारमण
उडुपी (कर्नाटक), 28 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि वर्ष 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने का मार्ग समावेशी विकास, मजबूत संस्थानों और व्यापक कौशल विकास पर आधारित होना चाहिए।
वित्त मंत्री यहां करकला तालुक में निट्टे विश्वविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित निट्टे विनय हेगड़े स्मृति व्याख्यान के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।
‘विकसित भारत- 2047 के लिए विजन’ विषय पर बोलते हुए सीतारमण ने कहा कि भारत की विकास यात्रा केवल प्रमुख आर्थिक संकेतकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित होना चाहिए कि अवसर छोटे कस्बों, ग्रामीण क्षेत्रों और पहली पीढ़ी के सीखने वालों तक पहुंचे।
वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विकास व्यापक और सहभागिता वाला होना चाहिए जहां समाज के प्रत्येक वर्ग का योगदान हो और आर्थिक प्रगति से उसे लाभ मिले।
उन्होंने यह बात रेखांकित की कि भारत का जनसांख्यिकी लाभांश तभी आर्थिक मजबूती में तब्दील होगा जब शिक्षा और कौशल विकास में सतत निवेश होगा। उन्होंने कहा कि संस्थानों को उद्योग की उभरती जरूरतों और प्रौद्योगिकीय बदलावों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करना होगा जिससे युवा रोजगार के लायक और उद्यमी बनें।
सीतारमण ने कहा, ‘‘युवा आजीविकाओं का निर्माण कर सकें और अर्थव्यवस्था में सार्थक योगदान दे सकें, यह सुनिश्चित करने के लिए पेशेवर प्रशिक्षण तक सुगम पहुंच और सतत कौशल विकास महत्वपूर्ण है।”
उन्होंने उभरते उद्योगों के साथ-साथ पारंपरिक क्षेत्रों की भूमिकाओं को भी रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि शिल्प, छोटे उपक्रम और क्षेत्र विशेष के कौशलों की वैश्विक बाजारों में जबरदस्त संभावनाएं हैं और प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण एवं बाजार से जुड़ाव के जरिए इन्हें मजबूत किया जाना आवश्यक है। ये क्षेत्र जमीनी स्तर पर रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
वित्त मंत्री ने भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति के संदर्भ में कहा कि इस देश को तेजी से एक विश्वसनीय साझीदार और वैश्विक वृद्धि के कारक के तौर पर देखा जा रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य महज ऊंची वृद्धि हासिल करना नहीं है, बल्कि समान वृद्धि है जो सभी क्षेत्रों में आजीविका में सुधार लाए। क्षमता निर्माण के साथ ही इस बात पर भी जोर होना चाहिए कि विकास का लाभ हर क्षेत्र तक पहुंचे।
कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष यूटी खादर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से निपटने में एक प्रत्यक्ष भूमिका का निर्वहन करना होगा।
उन्होंने तटीय कर्नाटक में प्रतिभाओं को निखारने और क्षेत्रीय विकास में संस्थानों के योगदान की सराहना की।
निट्टे विश्वविद्यालय के ‘प्रो-कुलाधिपति’ डॉक्टर एम. शांताराम शेट्टी ने कहा कि शिक्षाविद निट्टे विनय हेगड़े की विरासत को सम्मान देने और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर संवाद के लिए एक मंच का निर्माण करने के उद्देश्य से यह व्याख्यान श्रृंखला शुरू की गई है।
उन्होंने कहा कि मानव पूंजी निर्माण, नवप्रवर्तन को बढ़ावा देने और इस देश के दीर्घकालीन विकास लक्ष्यों को सहयोग देने में उच्च शिक्षण संस्थानों की एक महत्वपूर्ण भूमिका है।
भाषा सं राजेंद्र संतोष
संतोष

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