स्वदेशी बुलेट ट्रेन: विशेषज्ञों ने कदम का स्वागत किया, लेकिन व्यवहार्यता परीक्षण का आग्रह किया

स्वदेशी बुलेट ट्रेन: विशेषज्ञों ने कदम का स्वागत किया, लेकिन व्यवहार्यता परीक्षण का आग्रह किया

स्वदेशी बुलेट ट्रेन: विशेषज्ञों ने कदम का स्वागत किया, लेकिन व्यवहार्यता परीक्षण का आग्रह किया
Modified Date: March 21, 2026 / 05:42 pm IST
Published Date: March 21, 2026 5:42 pm IST

नयी दिल्ली, 21 मार्च (भाषा) देश में 250 किलोमीटर (किमी) प्रति घंटे की अधिकतम गति से चलने वाली बुलेट ट्रेन के निर्माण के कदम का स्वागत करते हुए विशेषज्ञों ने रेल मंत्रालय को आगाह किया कि प्रोटोटाइप का परीक्षण किए बिना उत्पादन बढ़ाना जोखिम भरा हो सकता है।

विशेषज्ञों की यह चेतावनी उन खबरों के बाद आई है कि मंत्रालय जल्द ही अन्य ट्रेनों के लिए निविदा जारी करेगा।

मंत्रालय ने ‘मेड-इन-इंडिया’ पहल को बढ़ावा देने के लिए 2024 में ‘भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड’ (बीईएमएल) को 2027 तक 250 किमी प्रति घंटे की गति से चलने वाली दो बुलेट ट्रेन को विकसित करने का ठेका दिया था।

हाल ही में मंत्रालय ने एक संसदीय समिति को सूचित किया कि भारत में निर्मित पहली दो बुलेट ट्रेनें 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद उच्च गति वाले रेल कॉरिडोर पर चलेंगी।

इनका नाम बी28 है।

रेल कॉरिडोर का पहला चरण सूरत से वापी तक 97 किलोमीटर का खंड अगस्त 2027 में शुरू होने की उम्मीद है।

‘जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी’ की वित्तीय सहायता से इस कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें जापानी सिग्नलिंग प्रौद्योगिकी का उपयोग कर जापान में निर्मित 320 किमी/घंटा की गति वाली बुलेट ट्रेनें चलाई जाएंगी।

मंत्रालय ने संसदीय समिति के समक्ष अपने निर्णयों के समर्थन में कहा कि जापान निर्मित ट्रेनों को प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियों के कारण मंत्रालय ने पहले चरण में 250 किमी/घंटा की गति क्षमता वाली स्वदेशी ट्रेनों को विकसित करने का निर्णय लिया, जिसे बाद में 320 या 350 किमी/घंटा तक उन्नत किया जाएगा।

अधिकारियों ने चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि जापान ने अपने पहले के प्रस्ताव ई5 शिंकानसेन ट्रेन के बजाय अधिक उन्नत ई10 शिंकानसेन ट्रेन का प्रस्ताव रखा।

ई5 का उत्पादन वर्तमान में जापान में बंद हो चुका है।

रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “जापान के प्रस्ताव के अनुसार, ई10 शिंकानसेन ट्रेन को 2030 के दशक की शुरुआत तक जापान में शुरू किए जाने की उम्मीद है और उसके बाद, भारतीय जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप आवश्यक डिजाइन परिवर्तन कर इन्हें 2032 तक परीक्षण के लिए पेश किए जाने की उम्मीद है। इससे पूरी परियोजना की शुरुआत में देरी होगी, इसलिए, मंत्रालय ने स्वदेशी बी28 ट्रेनों को चुनने का निर्णय लिया।”

मंत्रालय ने बी28 ट्रेनों के लिए सिगनल प्रणाली स्थापित करने का ठेका 2025 में ‘सीमेंस’ को दिया था।

अब, ऐसी खबरों के बीच कि मंत्रालय बीईएमएल को एक दर्जन से अधिक बी28 ट्रेन के उत्पादन के लिए निविदा दे सकता है, बुनियादी ढांचा विशेषज्ञों के एक वर्ग ने मुंबई-अहमदाबाद उच्च गति वाले कॉरिडोर पर काम के समापन की सराहना करते हुए भी उत्पादन बढ़ाने के निर्णय पर आपत्ति जताई है।

रेलवे बोर्ड के पूर्व इंजीनियरिंग सदस्य सुबोध जैन ने कहा, “अगर आप भारत में लोकोमोटिव निर्माण के इतिहास पर नजर डालें, तो आप पाएंगे कि हमने पहले लोकोमोटिव आयात किए, फिर तकनीक को यहां स्थानांतरित कराया और अपना उत्पादन शुरू किया।”

उन्होंने कहा, “अब तक, हमने स्वदेशी रूप से 180 किमी प्रति घंटे की चलने की क्षमता वाले लोकोमोटिव विकसित किए हैं। इसलिए, 250 किमी प्रति घंटे की ट्रेन के लिए प्रोटोटाइप का व्यवहार्यता परीक्षण अनिवार्य है।”

जैन ने कहा कि 250 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेन की तकनीक 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेन से पूरी तरह अलग है। बाद में 250 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेन को 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेन में उन्नत नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा, “उत्पादन शुरू करने से पहले हमें 250 किमी प्रति घंटे या 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेन का ‘प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट’ परीक्षण करना होगा।”

भाषा जितेंद्र दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में