‘आदित्य-एल1’ मिशन के आंकड़ों का अध्ययन करने के लिए भारतीय शोधकर्ताओं से प्रस्ताव आमंत्रित
‘आदित्य-एल1’ मिशन के आंकड़ों का अध्ययन करने के लिए भारतीय शोधकर्ताओं से प्रस्ताव आमंत्रित
नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि वह आदित्य-एल1 मिशन से प्राप्त आंकड़ों के अध्ययन के लिए भारतीय सौर भौतिकी समुदाय से प्रस्ताव आमंत्रित कर रहा है। आदित्य-एल1 सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला अंतरिक्ष-आधारित भारतीय मिशन है।
आदित्य-एल1 मिशन के आंकड़ों तक भारतीय वैज्ञानिकों की पहुंच के लिए इसरो की ओर से यह दूसरी औपचारिक अपील है। इससे पहले जनवरी में अपील की गयी थी।
इसरो ने एक बयान में कहा, “वर्तमान में, सार्वजनिक क्षेत्र में 27 टीबी (टेराबाइट) से अधिक डेटा उपलब्ध है, और कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिणाम अंतरराष्ट्रीय अकादमिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। इस अनूठे मिशन से वैज्ञानिक लाभ को और अधिक बढ़ाने के लिए, इसरो ने आदित्य-एल1 अवलोकन समय के लिए भारतीय सौर भौतिकी समुदाय से प्रस्ताव आमंत्रित करते हुए दूसरे प्रस्ताव आमंत्रण (एओ) जारी किया है।”
भारत में स्थित संस्थानों, विश्वविद्यालयों या कॉलेजों में कार्यरत भारतीय वैज्ञानिक और शोधकर्ता प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदकों को सौर विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान में संलग्न होना चाहिए और आवश्यक वैज्ञानिक और तकनीकी औचित्य के साथ सौर अवलोकन के लिए प्रमुख अन्वेषक के रूप में प्रस्ताव प्रस्तुत करने में सक्षम होना चाहिए।
इस दूसरे प्रस्ताव आमंत्रण चक्र के लिए स्वीकृत पर्यवेक्षण जुलाई और सितंबर के बीच होंगे।
सितंबर 2023 में प्रक्षेपित आदित्य एल1 सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला भारतीय अंतरिक्ष मिशन है। यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंज बिंदु 1 (एल1) के चारों ओर एक हेलो कक्षा में जनवरी 2024 में स्थापित हुआ था। एल1 बिंदु के चारों ओर हेलो कक्षा में स्थापित उपग्रह का प्रमुख लाभ यह है कि यह बिना किसी ग्रहण/अवरोध के सूर्य का निरंतर अवलोकन कर सकता है।
भाषा
प्रशांत देवेंद्र
देवेंद्र

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