एक्सपोसैट मिशन के डेटा के अध्ययन के लिए इसरो ने भारतीय शोधकर्ताओं से मांगे प्रस्ताव

एक्सपोसैट मिशन के डेटा के अध्ययन के लिए इसरो ने भारतीय शोधकर्ताओं से मांगे प्रस्ताव

एक्सपोसैट मिशन के डेटा के अध्ययन के लिए इसरो ने भारतीय शोधकर्ताओं से मांगे प्रस्ताव
Modified Date: June 22, 2026 / 08:15 pm IST
Published Date: June 22, 2026 8:15 pm IST

नयी दिल्ली, 22 जून (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने सोमवार को ‘अवसर की घोषणा’ (एनाउंसमेंट ऑफ ऑपर्च्युनिटी) जारी करते हुए देश के खगोल विज्ञान समुदाय से एक्सपोसैट (एक्स-रे पोलारिमीटर सैटेलाइट) मिशन के डेटा तक पहुंच के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किया।

यह मिशन अत्यंत विषम परिस्थितियों में मौजूद चमकीले खगोलीय एक्स-रे स्रोतों का अध्ययन करता है।

एक्सपोसैट उपग्रह का प्रक्षेपण एक जनवरी 2024 को किया गया था। यह सैटेलाइट अभी पृथ्वी के चारों ओर भूमध्य रेखा के पास वाली कक्षा में 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगा रहा है।

इस उपग्रह में दो वैज्ञानिक ‘पेलोड’ लगाए गए हैं, जो ब्लैक होल, न्यूट्रॉन तारों सहित विभिन्न खगोलीय पिंडों से निकलने वाले एक्स-रे विकिरण के तंत्र का अध्ययन करने में मदद करते हैं।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक बयान में कहा कि मिशन के डेटा तक पहुंच के लिए केवल ‘‘भारत स्थित संस्थानों, विश्वविद्यालयों या महाविद्यालयों में कार्यरत भारतीय वैज्ञानिक अथवा शोधकर्ता’’ ही प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं।

एक्सपोसैट देश का पहला उपग्रह-आधारित मिशन है, जिसे विशेष रूप से एक्स-रे ध्रुवणमिति (पोलारिमीट्री) माप के लिए अंतरिक्ष में भेजा गया है।

इसरो के अनुसार, ये माप वैज्ञानिकों की समझ में दो अतिरिक्त आयाम जोड़ते हैं-ध्रुवण की मात्रा और ध्रुवण का कोण। इस कारण यह खगोलीय स्रोतों से होने वाली विकिरण प्रक्रियाओं को समझने के लिए एक अत्यंत प्रभावी विश्लेषणात्मक उपकरण है।

एक्सपोसैट मिशन के प्रक्षेपण से पहले वैज्ञानिक मुख्य रूप से स्पेक्ट्रोस्कोपी, इमेजिंग और समय-आधारित डेटा (आंकड़ों) पर निर्भर थे, जो या तो भू-आधारित दूरबीनों अथवा प्रकाशीय से लेकर रेडियो आवृत्ति बैंड तक के उपग्रह-आधारित मिशनों से प्राप्त होते थे।

हालांकि इन माध्यमों से बड़ी मात्रा में डेटा उपलब्ध हुए, लेकिन खगोलीय स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन की वास्तविक प्रकृति को समझना खगोलविदों के लिए अब भी एक बड़ी चुनौती थी। एक्सपोसैट मिशन ने इन उत्सर्जनों के बारे में वैज्ञानिक ज्ञान का दायरा और विस्तृत करने में मदद की है।

भाषा रवि कांत रवि कांत अविनाश

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