महिला कैदी के यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिये ‘झालसा’ का दल बिरसा मुंडा जेल पहुंचा
महिला कैदी के यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिये ‘झालसा’ का दल बिरसा मुंडा जेल पहुंचा
रांची, 19 मई (भाषा) एक महिला कैदी के यौन शोषण के आरोप की जांच के लिये झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) की एक टीम ने मंगलवार को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार का दौरा किया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
झालसा की सचिव कुमारी रंजना अस्थाना ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति एस.एन. प्रसाद के निर्देश पर, रांची जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के सचिव राकेश रौशन के नेतृत्व में चार सदस्यीय दल ने बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार का दौरा किया था।
अस्थाना ने कहा, “टीम ने प्रथम दृष्टया आरोपों को सही पाया है। हालांकि, हम उनकी रिपोर्ट देखने के बाद ही टिप्पणी कर सकते हैं, जिसे झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष को प्रस्तुत किया जाएगा।”
टीम ने पीड़ित से घटना के बारे में पूछताछ की और साथ ही आरोपी अधिकारियों और अन्य कैदियों से भी पूछताछ की।
सोमवार को रांची के उपायुक्त मंजुनाथ भजंत्री ने बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के अधीक्षक द्वारा एक महिला कैदी के कथित यौन शोषण की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था।
भजंत्री ने सोमवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया था कि जांच समिति का नेतृत्व अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (कानून-व्यवस्था) करेंगे और इसमें जिला समाज कल्याण अधिकारी (डीएसडब्ल्यूओ) और एक महिला चिकित्सा अधिकारी शामिल होंगी।
उपायुक्त ने कहा, “वह मामले के सभी पहलुओं पर गौर करने के बाद जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।”
सोमवार को रांची में पत्रकारों से बात करते हुए भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने बिरसा मुंडा कारागार में एक महिला कैदी के साथ कथित यौन शोषण के मामले में न्यायिक जांच की मांग की।
साह ने कहा, “बिरसा मुंडा कारागार के अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर एक आदतन अपराधी हैं, जिन पर अतीत में लगातार गंभीर आरोप लगते रहे हैं।”
साह ने सवाल किया, “अगर महिला कैदी के साथ वाकई कोई यौन शोषण नहीं हुआ था, तो 17 मई को उसका गर्भावस्था परीक्षण क्यों किया गया?”
उन्होंने जेल प्रशासन पर मामले को दबाने के लिए कथित महिला कैदी का गुपचुप तरीके से गर्भपात कराने का भी आरोप लगाया।
भाजपा नेता ने कारागार महानिरीक्षक सुदर्शन मंडल पर सबूत नष्ट करने और मामले को दबाने का आरोप भी लगाया।
साह ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कारागार अधीक्षक और कारागार महानिरीक्षक को निलंबित करने की मांग की।
भाषा
प्रशांत मनीषा
मनीषा

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